कोविड का कारण बनने वाले वायरस SARS-CoV-2 से संक्रमित होने पर ज्यादातर बच्चों में या तो बहुत कम लक्षण दिखाई देते हैं या लक्षण द‍िखाई ही नहीं देते. पर कुछ बच्चों में यह इनफेक्‍शन काफी सीरियस हो जाता है. कई बार तो बच्‍चों को अस्‍पताल में भर्ती कराने की नौबतआ जाती है. अभी तक यह साफ नहीं था कि कुछ बच्चों में कोविड गंभीर रूप क्यों ले लेता है. लेकिन ‘द कनर्वसेशन’ में एक ताजा स्‍टडी से पता चला है कि इसका संबंध शरीर के इम्यून सिस्टम के र‍िएक्‍शन से जुड़ा है. इस शोध से यह समझने में मदद मिली है कि कोविड और दूसरी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों के दौरान बच्चों का शरीर संक्रमण से कैसे लड़ता है. इस अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका के 333 बच्चों के ब्‍लड में जीन्‍स की सक्रियता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इन बच्चों की आनुवंशिक पृष्ठभूमि लगभग एक जैसी ही थी. जीन की सक्रियता का अध्ययन करने से यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण होने पर शरीर के कौन-से जीन सक्रिय होते हैं और कौन-से कम सक्रिय हो जाते हैं. इसके लिए एक साथ हजारों जीन की गतिविधियों को मापा गया. इस अध्ययन में शामिल 127 बच्चों को हेल्‍दी माना गया था. वहीं, 71 बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण थे या उनमें कोई लक्षण नहीं था. इसके अलावा, 41 बच्चों को गंभीर कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अध्ययन में 47 बच्चे रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (RSV) के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे. यह वायरस भी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. वहीं, 47 बच्चे फेफड़ों के तपेदिक यानी टीबी से पीड़ित थे. अध्ययन में केवल उन बच्चों को शामिल किया गया, जो श्वसन संबंधी किसी एक ही संक्रमण से प्रभावित थे.

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

कोविड का कारण बनने वाले वायरस SARS-CoV-2 से संक्रमित होने पर ज्यादातर बच्चों में या तो बहुत कम लक्षण दिखाई देते हैं या लक्षण द‍िखाई ही नहीं देते. पर कुछ बच्चों में यह इनफेक्‍शन काफी सीरियस हो जाता है. कई बार तो बच्‍चों को अस्‍पताल में भर्ती कराने की नौबतआ जाती है. अभी तक यह साफ नहीं था कि कुछ बच्चों में कोविड गंभीर रूप क्यों ले लेता है. लेकिन ‘द कनर्वसेशन’ में एक ताजा स्‍टडी से पता चला है कि इसका संबंध शरीर के इम्यून सिस्टम के र‍िएक्‍शन से जुड़ा है. इस शोध से यह समझने में मदद मिली है कि कोविड और दूसरी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों के दौरान बच्चों का शरीर संक्रमण से कैसे लड़ता है.

इस अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका के 333 बच्चों के ब्‍लड में जीन्‍स की सक्रियता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इन बच्चों की आनुवंशिक पृष्ठभूमि लगभग एक जैसी ही थी. जीन की सक्रियता का अध्ययन करने से यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण होने पर शरीर के कौन-से जीन सक्रिय होते हैं और कौन-से कम सक्रिय हो जाते हैं. इसके लिए एक साथ हजारों जीन की गतिविधियों को मापा गया. इस अध्ययन में शामिल 127 बच्चों को हेल्‍दी माना गया था. वहीं, 71 बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण थे या उनमें कोई लक्षण नहीं था. इसके अलावा, 41 बच्चों को गंभीर कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अध्ययन में 47 बच्चे रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (RSV) के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे. यह वायरस भी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. वहीं, 47 बच्चे फेफड़ों के तपेदिक यानी टीबी से पीड़ित थे. अध्ययन में केवल उन बच्चों को शामिल किया गया, जो श्वसन संबंधी किसी एक ही संक्रमण से प्रभावित थे.

गंभीर संक्रमण में 5,000 से ज्यादा जीन की गतिविधि बदली

अध्ययन में ऐसे हजारों जीन मिले, जिनकी गतिविधियां गंभीर कोविड और दूसरे श्वसन संक्रमणों से पीड़ित बच्चों में स्वस्थ बच्चों की तुलना में अलग थीं. गंभीर श्वसन संक्रमण से जूझ रहे बच्चों में 5,000 से ज्यादा जीन की सक्रियता में बदलाव देखा गया. इनमें से कई जीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े थे. उदाहरण के लिए, गंभीर संक्रमण से पीड़ित बच्चों में न्यूट्रोफिल की प्रतिक्रिया ज्यादा मजबूत थी. न्यूट्रोफिल एक तरह की प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं. ये संक्रमण के खिलाफ शरीर की शुरुआती रक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं और रोगाणुओं से लड़ने में मदद करती हैं.

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •कोविड का कारण बनने वाले वायरस SARS-CoV-2 से संक्रमित होने पर ज्यादातर बच्चों में या तो बहुत कम लक्षण दिखाई देते हैं या लक्षण द‍िखाई ही नहीं देते. पर कुछ बच्चों में यह इनफेक्‍शन काफी सीरियस हो जाता है. कई बार तो बच्‍चों को अस्‍पताल में भर्ती कराने की नौबतआ जाती है. अभी तक यह साफ नहीं था कि कुछ बच्चों में कोविड गंभीर रूप क्यों ले लेता है. लेकिन ‘द कनर्वसेशन’ में एक ताजा स्‍टडी से पता चला है कि इसका संबंध शरीर के इम्यून सिस्टम के र‍िएक्‍शन से जुड़ा है. इस शोध से यह समझने में मदद मिली है कि कोविड और दूसरी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों के दौरान बच्चों का शरीर संक्रमण से कैसे लड़ता है.
  • •इस अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका के 333 बच्चों के ब्‍लड में जीन्‍स की सक्रियता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इन बच्चों की आनुवंशिक पृष्ठभूमि लगभग एक जैसी ही थी. जीन की सक्रियता का अध्ययन करने से यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण होने पर शरीर के कौन-से जीन सक्रिय होते हैं और कौन-से कम सक्रिय हो जाते हैं. इसके लिए एक साथ हजारों जीन की गतिविधियों को मापा गया. इस अध्ययन में शामिल 127 बच्चों को हेल्‍दी माना गया था. वहीं, 71 बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण थे या उनमें कोई लक्षण नहीं था. इसके अलावा, 41 बच्चों को गंभीर कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अध्ययन में 47 बच्चे रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (RSV) के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे. यह वायरस भी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. वहीं, 47 बच्चे फेफड़ों के तपेदिक यानी टीबी से पीड़ित थे. अध्ययन में केवल उन बच्चों को शामिल किया गया, जो श्वसन संबंधी किसी एक ही संक्रमण से प्रभावित थे.
  • •गंभीर संक्रमण में 5,000 से ज्यादा जीन की गतिविधि बदली
  • •अध्ययन में ऐसे हजारों जीन मिले, जिनकी गतिविधियां गंभीर कोविड और दूसरे श्वसन संक्रमणों से पीड़ित बच्चों में स्वस्थ बच्चों की तुलना में अलग थीं. गंभीर श्वसन संक्रमण से जूझ रहे बच्चों में 5,000 से ज्यादा जीन की सक्रियता में बदलाव देखा गया. इनमें से कई जीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े थे. उदाहरण के लिए, गंभीर संक्रमण से पीड़ित बच्चों में न्यूट्रोफिल की प्रतिक्रिया ज्यादा मजबूत थी. न्यूट्रोफिल एक तरह की प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं. ये संक्रमण के खिलाफ शरीर की शुरुआती रक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं और रोगाणुओं से लड़ने में मदद करती हैं.

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।