बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने सेंटॉरस एक्स-3 में पदार्थ के प्रवाह और उसके आसपास की संरचना का अध्ययन किया है। किन्जल रॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, यह एक्स-रे पल्सर पदार्थ को एक व्यवस्थित अभिवृद्धि डिस्क और उसके साथ घूमती अभिवृद्धि धारा के माध्यम से ग्रहण करता है। निष्कर्ष इस प्रणाली में पदार्थ के संचय और न्यूट्रॉन तारे के घूर्णन के बीच संबंध समझने में मदद करते हैं। सेंटॉरस एक्स-3 एक उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणाली है। इसमें अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा अपने साथी तारे से पदार्थ प्राप्त करता है। साथी तारे का द्रव्यमान सूर्य से दस गुने से अधिक है। यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष दूर, सेंटॉरस तारामंडल में स्थित है और चमकीले एक्स-रे पल्सरों में गिनी जाती है।

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने सेंटॉरस एक्स-3 में पदार्थ के प्रवाह और उसके आसपास की संरचना का अध्ययन किया है। किन्जल रॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, यह एक्स-रे पल्सर पदार्थ को एक व्यवस्थित अभिवृद्धि डिस्क और उसके साथ घूमती अभिवृद्धि धारा के माध्यम से ग्रहण करता है। निष्कर्ष इस प्रणाली में पदार्थ के संचय और न्यूट्रॉन तारे के घूर्णन के बीच संबंध समझने में मदद करते हैं।

सेंटॉरस एक्स-3 एक उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणाली है। इसमें अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा अपने साथी तारे से पदार्थ प्राप्त करता है। साथी तारे का द्रव्यमान सूर्य से दस गुने से अधिक है। यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष दूर, सेंटॉरस तारामंडल में स्थित है और चमकीले एक्स-रे पल्सरों में गिनी जाती है।

एक्स-रे द्वितारा में एक सघन पिंड—जैसे न्यूट्रॉन तारा या कृष्ण विवर—और एक साथी तारा होता है। जब साथी तारा विशाल हो, तो ऐसी प्रणाली को उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा कहा जाता है। सेंटॉरस एक्स-3 एक ग्रहणकारी द्वितारा भी है: पृथ्वी से देखने पर इसका साथी तारा समय-समय पर एक्स-रे स्रोत के सामने से गुजरता है। इसे 1971 में उहुरू एक्स-रे वेधशाला ने खोजा था और यह पहचाना गया पहला एक्स-रे पल्सर था।

अभिवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसमें कोई सघन खगोलीय पिंड आसपास के तारे या वातावरण से गैस और पदार्थ जुटाता है। घूमते हुए न्यूट्रॉन तारे का चुंबकीय क्षेत्र इस पदार्थ को उसके चुंबकीय ध्रुवों की ओर मोड़ सकता है। वहां से निकलने वाला एक्स-रे विकिरण तारे के घूमने के साथ नियमित अंतराल पर दिखाई देता है, जिसे पल्स के रूप में दर्ज किया जाता है।

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने सेंटॉरस एक्स-3 में पदार्थ के प्रवाह और उसके आसपास की संरचना का अध्ययन किया है। किन्जल रॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, यह एक्स-रे पल्सर पदार्थ को एक व्यवस्थित अभिवृद्धि डिस्क और उसके साथ घूमती अभिवृद्धि धारा के माध्यम से ग्रहण करता है। निष्कर्ष इस प्रणाली में पदार्थ के संचय और न्यूट्रॉन तारे के घूर्णन के बीच संबंध समझने में मदद करते हैं।
  • •सेंटॉरस एक्स-3 एक उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा प्रणाली है। इसमें अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा अपने साथी तारे से पदार्थ प्राप्त करता है। साथी तारे का द्रव्यमान सूर्य से दस गुने से अधिक है। यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 24,000 प्रकाश-वर्ष दूर, सेंटॉरस तारामंडल में स्थित है और चमकीले एक्स-रे पल्सरों में गिनी जाती है।
  • •एक्स-रे द्वितारा में एक सघन पिंड—जैसे न्यूट्रॉन तारा या कृष्ण विवर—और एक साथी तारा होता है। जब साथी तारा विशाल हो, तो ऐसी प्रणाली को उच्च-द्रव्यमान वाली एक्स-रे द्वितारा कहा जाता है। सेंटॉरस एक्स-3 एक ग्रहणकारी द्वितारा भी है: पृथ्वी से देखने पर इसका साथी तारा समय-समय पर एक्स-रे स्रोत के सामने से गुजरता है। इसे 1971 में उहुरू एक्स-रे वेधशाला ने खोजा था और यह पहचाना गया पहला एक्स-रे पल्सर था।
  • •अभिवृद्धि वह प्रक्रिया है जिसमें कोई सघन खगोलीय पिंड आसपास के तारे या वातावरण से गैस और पदार्थ जुटाता है। घूमते हुए न्यूट्रॉन तारे का चुंबकीय क्षेत्र इस पदार्थ को उसके चुंबकीय ध्रुवों की ओर मोड़ सकता है। वहां से निकलने वाला एक्स-रे विकिरण तारे के घूमने के साथ नियमित अंतराल पर दिखाई देता है, जिसे पल्स के रूप में दर्ज किया जाता है।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

इस विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र और हितधारकों पर देखा जा रहा है। घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।