समाज और मानवता की सच्ची सेवा के लिए समर्पण, ईमानदारी, दया और करुणा का भाव जरूरी है। विशेषकर नर्सिंग के क्षेत्र में मरीजों की सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी है। धन के लालच में मानवीय मूल्यों को नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि सेवा से मिलने वाली दुआएं ही जीवन की वास्तविक संपत्ति हैं। ये बातें माउंट आबू, राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने शनिवार को घोसी स्थित एक नर्सिंग कॉलेज में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि नर्सिंग के विद्यार्थियों को चिकित्सा संबंधी ज्ञान के साथ ईमानदारी, भाईचारा, सहनशीलता, दया और करुणा जैसे सद्गुण भी अपनाने चाहिए। मरीजों की देखभाल करते समय उनके प्रति संवेदनशीलता और आत्मीयता का भाव रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी आवश्यक है। भौतिक शिक्षा रोजगार और आर्थिक समृद्धि के अवसर देती है, जबकि नैतिक मूल्य व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। जीवन की कठिन परिस्थितियों, पारिवारिक समस्याओं और कार्यस्थल की चुनौतियों का सामना करने के लिए सकारात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों का होना जरूरी है। भगवान भाई ने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर या अन्य पेशों में सफलता हासिल करने के बाद भी यदि व्यक्ति असंतुष्ट रहता है, तो उसकी उपलब्धियां उसे खुशी नहीं दे पातीं। नैतिक शिक्षा व्यक्ति को आत्मबल, विवेक और विपरीत परिस्थितियों में संतुलित रहने की शक्ति प्रदान करती है। इस अवसर पर बीके पूनम बहन, बीके सोनी बहन, बीके मंजू बहन, इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीके विवेकानंद भाई और सहायक अध्यापिका सुजाता गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने
- •समाज और मानवता की सच्ची सेवा के लिए समर्पण, ईमानदारी, दया और करुणा का भाव जरूरी है। विशेषकर नर्सिंग के क्षेत्र में मरीजों की सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी है। धन के लालच में मानवीय मूल्यों को नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि सेवा से मिलने वाली दुआएं ही जीवन की वास्तविक संपत्ति हैं। ये बातें माउंट आबू, राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने शनिवार को घोसी स्थित एक नर्सिंग कॉलेज में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि नर्सिंग के विद्यार्थियों को चिकित्सा संबंधी ज्ञान के साथ ईमानदारी, भाईचारा, सहनशीलता, दया और करुणा जैसे सद्गुण भी अपनाने चाहिए। मरीजों की देखभाल करते समय उनके प्रति संवेदनशीलता और आत्मीयता का भाव रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी आवश्यक है। भौतिक शिक्षा रोजगार और आर्थिक समृद्धि के अवसर देती है, जबकि नैतिक मूल्य व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। जीवन की कठिन परिस्थितियों, पारिवारिक समस्याओं और कार्यस्थल की चुनौतियों का सामना करने के लिए सकारात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों का होना जरूरी है। भगवान भाई ने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर या अन्य पेशों में सफलता हासिल करने के बाद भी यदि व्यक्ति असंतुष्ट रहता है, तो उसकी उपलब्धियां उसे खुशी नहीं दे पातीं। नैतिक शिक्षा व्यक्ति को आत्मबल, विवेक और विपरीत परिस्थितियों में संतुलित रहने की शक्ति प्रदान करती है। इस अवसर पर बीके पूनम बहन, बीके सोनी बहन, बीके मंजू बहन, इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीके विवेकानंद भाई और सहायक अध्यापिका सुजाता गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
इस विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र और हितधारकों पर देखा जा रहा है। घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।




