भागलपुर. जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की जांच का असर अब विभागीय कामकाज पर भी दिखने लगा है. डीपीओ स्थापना की गिरफ्तारी और कार्यालय की आईडी ब्लॉक होने के बाद स्थापना शाखा के कई कार्य प्रभावित हैं. इसका सीधा असर जिले के करीब चार हजार शिक्षकों के वेतन भुगतान पर पड़ रहा है. सितंबर का वेतन मिलने में देरी की आशंका से शिक्षक असमंजस में हैं. दुर्गापूजा से पहले वेतन भुगतान को लेकर उनकी चिंता बढ़ गयी है. वहीं, विभागीय कामकाज प्रभावित होने से जरूरी कार्यों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंच रहे शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मामले के अनुसार, शिक्षकों के वेतन का अंतिम विपत्र जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा से कोषागार भेजा गया था. कुछ त्रुटियों के कारण विपत्र वापस लौट आया. इसी बीच मुख्यालय से एचआरएमएस पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी शिक्षक पहचान पत्र बनाकर भुगतान किये जाने की सूचना मिली. जांच के दौरान 98.12 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया. इस मामले में डीपीओ स्थापना और संविदा पर कार्यरत ऑपरेटर अविनाश राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वापस लौटे वेतन विपत्र में कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर करीब 72 लाख रुपये के भुगतान का मामला भी शामिल बताया जा रहा है. आशंका जतायी गयी कि यदि विपत्र पारित हो जाता, तो यह राशि फर्जी खाते में चली जाती. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

वारदात कैसे हुई और कैसे खुला राज

भागलपुर. जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की जांच का असर अब विभागीय कामकाज पर भी दिखने लगा है. डीपीओ स्थापना की गिरफ्तारी और कार्यालय की आईडी ब्लॉक होने के बाद स्थापना शाखा के कई कार्य प्रभावित हैं. इसका सीधा असर जिले के करीब चार हजार शिक्षकों के वेतन भुगतान पर पड़ रहा है. सितंबर का वेतन मिलने में देरी की आशंका से शिक्षक असमंजस में हैं. दुर्गापूजा से पहले वेतन भुगतान को लेकर उनकी चिंता बढ़ गयी है. वहीं, विभागीय कामकाज प्रभावित होने से जरूरी कार्यों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंच रहे शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मामले के अनुसार, शिक्षकों के वेतन का अंतिम विपत्र जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा से कोषागार भेजा गया था. कुछ त्रुटियों के कारण विपत्र वापस लौट आया. इसी बीच मुख्यालय से एचआरएमएस पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी शिक्षक पहचान पत्र बनाकर भुगतान किये जाने की सूचना मिली. जांच के दौरान 98.12 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया. इस मामले में डीपीओ स्थापना और संविदा पर कार्यरत ऑपरेटर अविनाश राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वापस लौटे वेतन विपत्र में कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर करीब 72 लाख रुपये के भुगतान का मामला भी शामिल बताया जा रहा है. आशंका जतायी गयी कि यदि विपत्र पारित हो जाता, तो यह राशि फर्जी खाते में चली जाती. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राणा झा के अनुसार, शिक्षकों को वेतन विपत्र कोषागार भेजे जाने की जानकारी मिली थी. लेकिन कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आने के बाद निदेशालय ने डीपीओ कार्यालय की आईडी ब्लॉक कर दी. आईडी ब्लॉक होने और स्थापना शाखा के कामकाज प्रभावित रहने से वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है. ऐसे में जिले के करीब चार हजार शिक्षकों के सितंबर महीने के वेतन पर अनिश्चितता बनी हुई है. राणा झा ने जल्द नये पदाधिकारी को प्रभार दिलाने का प्रयास किये जाने की बात कही, ताकि विभागीय कार्यों को सामान्य किया जा सके.

पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने

  • •भागलपुर. जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की जांच का असर अब विभागीय कामकाज पर भी दिखने लगा है. डीपीओ स्थापना की गिरफ्तारी और कार्यालय की आईडी ब्लॉक होने के बाद स्थापना शाखा के कई कार्य प्रभावित हैं. इसका सीधा असर जिले के करीब चार हजार शिक्षकों के वेतन भुगतान पर पड़ रहा है. सितंबर का वेतन मिलने में देरी की आशंका से शिक्षक असमंजस में हैं. दुर्गापूजा से पहले वेतन भुगतान को लेकर उनकी चिंता बढ़ गयी है. वहीं, विभागीय कामकाज प्रभावित होने से जरूरी कार्यों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंच रहे शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
  • •मामले के अनुसार, शिक्षकों के वेतन का अंतिम विपत्र जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा से कोषागार भेजा गया था. कुछ त्रुटियों के कारण विपत्र वापस लौट आया. इसी बीच मुख्यालय से एचआरएमएस पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी शिक्षक पहचान पत्र बनाकर भुगतान किये जाने की सूचना मिली. जांच के दौरान 98.12 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया. इस मामले में डीपीओ स्थापना और संविदा पर कार्यरत ऑपरेटर अविनाश राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वापस लौटे वेतन विपत्र में कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर करीब 72 लाख रुपये के भुगतान का मामला भी शामिल बताया जा रहा है. आशंका जतायी गयी कि यदि विपत्र पारित हो जाता, तो यह राशि फर्जी खाते में चली जाती. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
  • •जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राणा झा के अनुसार, शिक्षकों को वेतन विपत्र कोषागार भेजे जाने की जानकारी मिली थी. लेकिन कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आने के बाद निदेशालय ने डीपीओ कार्यालय की आईडी ब्लॉक कर दी. आईडी ब्लॉक होने और स्थापना शाखा के कामकाज प्रभावित रहने से वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है. ऐसे में जिले के करीब चार हजार शिक्षकों के सितंबर महीने के वेतन पर अनिश्चितता बनी हुई है. राणा झा ने जल्द नये पदाधिकारी को प्रभार दिलाने का प्रयास किये जाने की बात कही, ताकि विभागीय कार्यों को सामान्य किया जा सके.

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

इस विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र और हितधारकों पर देखा जा रहा है। घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।