ब्राउन ड्वार्फ ग्रहों की एक अलग कैटेगरी में आते हैं. ये इतने बड़े नहीं होते कि तारों की तरह चमक सकें. ये अपने निर्माण के समय बची हुई गर्मी से हल्की रोशनी देते हैं. WISE 0855 इसी कैटेगरी का हिस्सा है. इसका तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. यह हमारी धरती की सतह से भी ज्यादा ठंडा है. इसका द्रव्यमान जुपिटर से लगभग दोगुना है. यह एक स्वतंत्र रूप से घूमने वाले विशाल ग्रह की तरह व्यवहार करता है.
मौसम का ताजा हाल: किन इलाकों में दिखा बड़ा असर?
ब्राउन ड्वार्फ ग्रहों की एक अलग कैटेगरी में आते हैं. ये इतने बड़े नहीं होते कि तारों की तरह चमक सकें. ये अपने निर्माण के समय बची हुई गर्मी से हल्की रोशनी देते हैं. WISE 0855 इसी कैटेगरी का हिस्सा है. इसका तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है.
यह हमारी धरती की सतह से भी ज्यादा ठंडा है. इसका द्रव्यमान जुपिटर से लगभग दोगुना है. यह एक स्वतंत्र रूप से घूमने वाले विशाल ग्रह की तरह व्यवहार करता है.
को-ऑथर मार्क मार्ले ने इसे समझने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया है. उन्होंने कहा, ‘हम एक जालीदार दरवाजे के जरिए इस ग्रह को देख रहे हैं. हमें उस दरवाजे और उसके दोनों तरफ की दुनिया को समझना होगा.’
ब्राउन ड्वार्फ का आर्टिस्ट इम्प्रेशन. ब्राउन ड्वार्फ की शुरुआत तो तारों की तरह होती है, लेकिन उनमें इतना द्रव्यमान (mass) कभी जमा नहीं हो पाता कि वे अपने केंद्र में परमाणुओं को लगातार फ्यूज कर सकें और तारों की तरह चमक सकें. (इमेज क्रेडिट: NASA/JPL-Caltech)
तापमान, बारिश और मौसम विभाग के आंकड़े
- •ब्राउन ड्वार्फ ग्रहों की एक अलग कैटेगरी में आते हैं. ये इतने बड़े नहीं होते कि तारों की तरह चमक सकें. ये अपने निर्माण के समय बची हुई गर्मी से हल्की रोशनी देते हैं. WISE 0855 इसी कैटेगरी का हिस्सा है. इसका तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है.
- •यह हमारी धरती की सतह से भी ज्यादा ठंडा है. इसका द्रव्यमान जुपिटर से लगभग दोगुना है. यह एक स्वतंत्र रूप से घूमने वाले विशाल ग्रह की तरह व्यवहार करता है.
- •को-ऑथर मार्क मार्ले ने इसे समझने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया है. उन्होंने कहा, ‘हम एक जालीदार दरवाजे के जरिए इस ग्रह को देख रहे हैं. हमें उस दरवाजे और उसके दोनों तरफ की दुनिया को समझना होगा.’
- •ब्राउन ड्वार्फ का आर्टिस्ट इम्प्रेशन. ब्राउन ड्वार्फ की शुरुआत तो तारों की तरह होती है, लेकिन उनमें इतना द्रव्यमान (mass) कभी जमा नहीं हो पाता कि वे अपने केंद्र में परमाणुओं को लगातार फ्यूज कर सकें और तारों की तरह चमक सकें. (इमेज क्रेडिट: NASA/JPL-Caltech)
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