दुनिया के मौसम पर अल-नीनो का असर बढ़ता जा रहा है. प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. दिसंबर 2026 में यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने और बारिश के तरीके में बदलाव आने का अनुमान है. कुछ जगहों पर सूखा पड़ सकता है, तो कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. WMO के मुताबिक, अल-नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसके दुनिया के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक होने का अनुमान है. इससे मौसम पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत में इस बार ठंड कम पड़ेगी. भारत में सर्दी पर इसका कितना असर होगा, यह अलग-अलग इलाकों के मौसम पर निर्भर करेगा.
मौसम का ताजा हाल: किन इलाकों में दिखा बड़ा असर?
दुनिया के मौसम पर अल-नीनो का असर बढ़ता जा रहा है. प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. दिसंबर 2026 में यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने और बारिश के तरीके में बदलाव आने का अनुमान है. कुछ जगहों पर सूखा पड़ सकता है, तो कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
WMO के मुताबिक, अल-नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसके दुनिया के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक होने का अनुमान है. इससे मौसम पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत में इस बार ठंड कम पड़ेगी. भारत में सर्दी पर इसका कितना असर होगा, यह अलग-अलग इलाकों के मौसम पर निर्भर करेगा.
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वैज्ञानिक अल-नीनो की ताकत का पता लगाने के लिए प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के तापमान पर नजर रखते हैं. इसके लिए नीनो 3.4 इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है. इससे पता चलता है कि समुद्र का तापमान सामान्य से कितना ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में इस इलाके का तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. अगस्त में यह बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया.
तापमान, बारिश और मौसम विभाग के आंकड़े
- •दुनिया के मौसम पर अल-नीनो का असर बढ़ता जा रहा है. प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. दिसंबर 2026 में यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने और बारिश के तरीके में बदलाव आने का अनुमान है. कुछ जगहों पर सूखा पड़ सकता है, तो कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
- •WMO के मुताबिक, अल-नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसके दुनिया के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक होने का अनुमान है. इससे मौसम पर बड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारत में इस बार ठंड कम पड़ेगी. भारत में सर्दी पर इसका कितना असर होगा, यह अलग-अलग इलाकों के मौसम पर निर्भर करेगा.
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- •वैज्ञानिक अल-नीनो की ताकत का पता लगाने के लिए प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के तापमान पर नजर रखते हैं. इसके लिए नीनो 3.4 इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता है. इससे पता चलता है कि समुद्र का तापमान सामान्य से कितना ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में इस इलाके का तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. अगस्त में यह बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया.
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
इस घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर समीक्षा जारी है। ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर विवरण को अद्यतन किया जाएगा।





