होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की गहराई 110 फीट तक मिली। अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी। होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की ...और पढ़ें

वारदात कैसे हुई और कैसे खुला राज

होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की गहराई 110 फीट तक मिली। अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी।

होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने होशियारपुर अवैध खनन की CBI जांच के दिए निर्देश।

CBI ड्रोन सर्वे और उपग्रह चित्रों से नुकसान का आकलन करेगी।

अवैध खनन में अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई।

पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने

  • •होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की गहराई 110 फीट तक मिली। अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी।
  • •होशियारपुर में अवैध खनन के आरोपों पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच और ड्रोन सर्वे के निर्देश दिए। खनन की ...और पढ़ें
  • •हाई कोर्ट ने होशियारपुर अवैध खनन की CBI जांच के दिए निर्देश।
  • •CBI ड्रोन सर्वे और उपग्रह चित्रों से नुकसान का आकलन करेगी।
  • •अवैध खनन में अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई।
  • •राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के होशियारपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और पर्यावरण को पहुंचाए जा रहे नुकसान के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को मामले में प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे क्षेत्र का विस्तृत ड्रोन सर्वे कराने और गूगल अर्थ, इसरो अथवा किसी अन्य विश्वसनीय स्रोत से त्रिआयामी उपग्रह चित्र हासिल करने को कहा है।
  • •अदालत का मानना है कि इन चित्रों की मदद से क्षेत्र में समय-समय पर हुए बदलावों और खनन से हुए नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच और सर्वे के लिए होने वाला पूरा खर्च पंजाब सरकार को वहन करना होगा।
  • •चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने राहुल मनचंदा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, होशियारपुर के सचिव को संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सह प्राधिकरण के सचिव की ओर से 14 सितंबर 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में जिले के कई गांवों में बड़े पैमाने पर खनन किए जाने की पुष्टि की गई।
  • •यह भी पढ़ें- हादसे में शिक्षिका 100 प्रतिशत दिव्यांग, न पदोन्नति और ना वेतन वृद्धि का लाभ; हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
  • •रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर खनन की गहराई 20 से 110 फीट तक पाई गई। कुछ स्थानों पर पानी भर जाने और पहुंचने में कठिनाई के कारण गहराई का पता नहीं लगाया जा सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निरीक्षण दल को वास्तविक स्थलों तक पहुंचने से रोकने या दूसरी ओर ले जाने के प्रयास किए गए। कई स्थानों पर रास्ते बंद मिले, जबकि कुछ जगहों पर रास्तों को तोड़ दिया गया था।

कानूनी कार्रवाई और आरोपियों की वर्तमान स्थिति

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के होशियारपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और पर्यावरण को पहुंचाए जा रहे नुकसान के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को मामले में प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे क्षेत्र का विस्तृत ड्रोन सर्वे कराने और गूगल अर्थ, इसरो अथवा किसी अन्य विश्वसनीय स्रोत से त्रिआयामी उपग्रह चित्र हासिल करने को कहा है।

अदालत का मानना है कि इन चित्रों की मदद से क्षेत्र में समय-समय पर हुए बदलावों और खनन से हुए नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच और सर्वे के लिए होने वाला पूरा खर्च पंजाब सरकार को वहन करना होगा।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने राहुल मनचंदा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, होशियारपुर के सचिव को संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सह प्राधिकरण के सचिव की ओर से 14 सितंबर 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में जिले के कई गांवों में बड़े पैमाने पर खनन किए जाने की पुष्टि की गई।

यह भी पढ़ें- हादसे में शिक्षिका 100 प्रतिशत दिव्यांग, न पदोन्नति और ना वेतन वृद्धि का लाभ; हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब

रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर खनन की गहराई 20 से 110 फीट तक पाई गई। कुछ स्थानों पर पानी भर जाने और पहुंचने में कठिनाई के कारण गहराई का पता नहीं लगाया जा सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निरीक्षण दल को वास्तविक स्थलों तक पहुंचने से रोकने या दूसरी ओर ले जाने के प्रयास किए गए। कई स्थानों पर रास्ते बंद मिले, जबकि कुछ जगहों पर रास्तों को तोड़ दिया गया था।

निरीक्षण के दौरान कई स्टोन क्रशर इकाइयों पर कर्मचारी नहीं मिले। हालांकि, वहां ट्रक, टिप्पर और जेसीबी जैसी भारी मशीनें खड़ी थीं। खनन सामग्री के ढेर भी पाए गए। रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि निरीक्षण की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच गई थी, जिसके कारण उस दिन काम बंद रखा गया।

अदालत ने इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित अधिकारी प्रथम दृष्टया अपने कर्तव्य में विफल रहे हैं। सरकारी अधिकारियों और खनन में शामिल लोगों के बीच मिलीभगत के आरोपों को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

इस घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर समीक्षा जारी है। ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर विवरण को अद्यतन किया जाएगा।