फलोदी में 150.22 ग्राम अवैध स्मैक पकड़ी: आरोपी गिरफ्तार, एक नाबालिग निरुद्ध; डीएसटी और पुलिस की कार्रवाई कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में हजारों किमी दूर हिंद महासागर के एक देश से लाई गई रबर वाइन आज सबसे परेशानी वाली वनस्पति बन गई है। इसे 150 से ज्यादा साल पहले एक सजावटी पौधे के तौर पर लाया गया था, लेकिन सबसे मुश्किल खरपतवार साबित हुई। इसे रोका न जाए तो चमकदार पत्तों और खूबसूरत फूलों वाली यह बेल 30 मीटर ऊपर पेड़ों की चोटियों तक चढ़ सकता है। नदियों के किनारों ढंक सकती है और नीचे मौजूद स्थानीय वनस्तपितों को खत्म कर सकती है। इसके साथ ही यह इंसानों और मवेशियों के लिए जहरीली भी होती है।ऑस्ट्रेलिया कैसे पहुंची रबर वाइन?रबर वाइन मूल रूप से अफ्रीका के पास हिंद महासागर में स्थित मेडागास्कर की है। हालांकि, अब यह पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, अमेरिका और मध्य व दक्षिणी अमेरिका में भी उगती है। ऑस्ट्रेलिया में इसकी कहानी 1860 के दशक में शुरू हुई। शुरुआत में इसे उत्तरी क्वींसलैंड के माइनिंग कस्बों के बगीचों में लगाया गया था।1917 तक लोगों ने इसके फैलने की शिकायतें करनी शुरू कर दी थीं। यह क्वींसलैंड के बड़े हिस्से, केप यॉर्क के दक्षिण, कारपेंटारिया की खाड़ी और दक्षिण में बंडाबर्ग के तटीय इलाकों तक फैल गई।रबर वाइन क्या है?रबर वाइन कई तनों वाली लकड़ीदार झाड़ी या बेल है। बिना सहारे के यह दो से तीन मीटर ऊंची घनी झाड़ी के रूप में बढ़ती है। लेकिन अगर इसे कोई सहारा मिल जाए तो 30 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ सकती है। इसके पत्ते गहरे हरे और चमकदार होते हैं। वहीं, इसके तुरही के आकार के बड़े-बड़े फूल बहुत आकर्षक होते हैं।रबर वाइन ट्रॉपिकल या सब-ट्रॉपिकल जलवायु वाले इलाकों में सबसे अच्छी तरह बढ़ती है। इसे लगातार पानी की जरूरत होती है। इसलिए यह छोटी-बड़ी नदियों और पानी बहने वाले इलाकों में फैल जाती है। यह छाया और अलग-अलग तरह के तापमान को झेल सकती है। सिर्फ पाला ही इसकी बढ़त को रोक सकता है। यह नदी और नालों के किनारे वनस्पतियों को खत्म करके घनी झाड़ियां बना लेती है।तेजी से बढ़ने की क्या है वजह?यह जंगली खरपतवार जानवरों के लिए भोजन और रहने का ठिकाना कम कर सकती है। इसके तेजी से बढ़ने की वजह भी बहुत दिलचस्प है। एक हेक्टेयर में फैली रबर वाइन हर साल लाखों बीज पैदा कर सकती है। इसमें 95 फीसदी ताजे बीज अंकुरित होने लायक होते हैं। इनमें से ज्यादातर 6-8 महीने तक इस लायक बने रहते हैं। बहुत सूखे वाले हालात में ये ये एक साल के भीतर मर जाते हैं। पौधा विकसित होने के बाद जमीन के नीचे इसकी जड़ें 12 मीटर की गहराई तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते पूरी तरह विकसित पौधों को हटाना बहुत मुश्किल होता है।

Detailed Chronological Breakdown

फलोदी में 150.22 ग्राम अवैध स्मैक पकड़ी: आरोपी गिरफ्तार, एक नाबालिग निरुद्ध; डीएसटी और पुलिस की कार्रवाई

कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में हजारों किमी दूर हिंद महासागर के एक देश से लाई गई रबर वाइन आज सबसे परेशानी वाली वनस्पति बन गई है। इसे 150 से ज्यादा साल पहले एक सजावटी पौधे के तौर पर लाया गया था, लेकिन सबसे मुश्किल खरपतवार साबित हुई। इसे रोका न जाए तो चमकदार पत्तों और खूबसूरत फूलों वाली यह बेल 30 मीटर ऊपर पेड़ों की चोटियों तक चढ़ सकता है। नदियों के किनारों ढंक सकती है और नीचे मौजूद स्थानीय वनस्तपितों को खत्म कर सकती है। इसके साथ ही यह इंसानों और मवेशियों के लिए जहरीली भी होती है।ऑस्ट्रेलिया कैसे पहुंची रबर वाइन?रबर वाइन मूल रूप से अफ्रीका के पास हिंद महासागर में स्थित मेडागास्कर की है। हालांकि, अब यह पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, अमेरिका और मध्य व दक्षिणी अमेरिका में भी उगती है। ऑस्ट्रेलिया में इसकी कहानी 1860 के दशक में शुरू हुई। शुरुआत में इसे उत्तरी क्वींसलैंड के माइनिंग कस्बों के बगीचों में लगाया गया था।1917 तक लोगों ने इसके फैलने की शिकायतें करनी शुरू कर दी थीं। यह क्वींसलैंड के बड़े हिस्से, केप यॉर्क के दक्षिण, कारपेंटारिया की खाड़ी और दक्षिण में बंडाबर्ग के तटीय इलाकों तक फैल गई।रबर वाइन क्या है?रबर वाइन कई तनों वाली लकड़ीदार झाड़ी या बेल है। बिना सहारे के यह दो से तीन मीटर ऊंची घनी झाड़ी के रूप में बढ़ती है। लेकिन अगर इसे कोई सहारा मिल जाए तो 30 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ सकती है। इसके पत्ते गहरे हरे और चमकदार होते हैं। वहीं, इसके तुरही के आकार के बड़े-बड़े फूल बहुत आकर्षक होते हैं।रबर वाइन ट्रॉपिकल या सब-ट्रॉपिकल जलवायु वाले इलाकों में सबसे अच्छी तरह बढ़ती है। इसे लगातार पानी की जरूरत होती है। इसलिए यह छोटी-बड़ी नदियों और पानी बहने वाले इलाकों में फैल जाती है। यह छाया और अलग-अलग तरह के तापमान को झेल सकती है। सिर्फ पाला ही इसकी बढ़त को रोक सकता है। यह नदी और नालों के किनारे वनस्पतियों को खत्म करके घनी झाड़ियां बना लेती है।तेजी से बढ़ने की क्या है वजह?यह जंगली खरपतवार जानवरों के लिए भोजन और रहने का ठिकाना कम कर सकती है। इसके तेजी से बढ़ने की वजह भी बहुत दिलचस्प है। एक हेक्टेयर में फैली रबर वाइन हर साल लाखों बीज पैदा कर सकती है। इसमें 95 फीसदी ताजे बीज अंकुरित होने लायक होते हैं। इनमें से ज्यादातर 6-8 महीने तक इस लायक बने रहते हैं। बहुत सूखे वाले हालात में ये ये एक साल के भीतर मर जाते हैं। पौधा विकसित होने के बाद जमीन के नीचे इसकी जड़ें 12 मीटर की गहराई तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते पूरी तरह विकसित पौधों को हटाना बहुत मुश्किल होता है।

Key Verified Facts

  • •फलोदी में 150.22 ग्राम अवैध स्मैक पकड़ी: आरोपी गिरफ्तार, एक नाबालिग निरुद्ध; डीएसटी और पुलिस की कार्रवाई
  • •कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में हजारों किमी दूर हिंद महासागर के एक देश से लाई गई रबर वाइन आज सबसे परेशानी वाली वनस्पति बन गई है। इसे 150 से ज्यादा साल पहले एक सजावटी पौधे के तौर पर लाया गया था, लेकिन सबसे मुश्किल खरपतवार साबित हुई। इसे रोका न जाए तो चमकदार पत्तों और खूबसूरत फूलों वाली यह बेल 30 मीटर ऊपर पेड़ों की चोटियों तक चढ़ सकता है। नदियों के किनारों ढंक सकती है और नीचे मौजूद स्थानीय वनस्तपितों को खत्म कर सकती है। इसके साथ ही यह इंसानों और मवेशियों के लिए जहरीली भी होती है।ऑस्ट्रेलिया कैसे पहुंची रबर वाइन?रबर वाइन मूल रूप से अफ्रीका के पास हिंद महासागर में स्थित मेडागास्कर की है। हालांकि, अब यह पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, अमेरिका और मध्य व दक्षिणी अमेरिका में भी उगती है। ऑस्ट्रेलिया में इसकी कहानी 1860 के दशक में शुरू हुई। शुरुआत में इसे उत्तरी क्वींसलैंड के माइनिंग कस्बों के बगीचों में लगाया गया था।1917 तक लोगों ने इसके फैलने की शिकायतें करनी शुरू कर दी थीं। यह क्वींसलैंड के बड़े हिस्से, केप यॉर्क के दक्षिण, कारपेंटारिया की खाड़ी और दक्षिण में बंडाबर्ग के तटीय इलाकों तक फैल गई।रबर वाइन क्या है?रबर वाइन कई तनों वाली लकड़ीदार झाड़ी या बेल है। बिना सहारे के यह दो से तीन मीटर ऊंची घनी झाड़ी के रूप में बढ़ती है। लेकिन अगर इसे कोई सहारा मिल जाए तो 30 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ सकती है। इसके पत्ते गहरे हरे और चमकदार होते हैं। वहीं, इसके तुरही के आकार के बड़े-बड़े फूल बहुत आकर्षक होते हैं।रबर वाइन ट्रॉपिकल या सब-ट्रॉपिकल जलवायु वाले इलाकों में सबसे अच्छी तरह बढ़ती है। इसे लगातार पानी की जरूरत होती है। इसलिए यह छोटी-बड़ी नदियों और पानी बहने वाले इलाकों में फैल जाती है। यह छाया और अलग-अलग तरह के तापमान को झेल सकती है। सिर्फ पाला ही इसकी बढ़त को रोक सकता है। यह नदी और नालों के किनारे वनस्पतियों को खत्म करके घनी झाड़ियां बना लेती है।तेजी से बढ़ने की क्या है वजह?यह जंगली खरपतवार जानवरों के लिए भोजन और रहने का ठिकाना कम कर सकती है। इसके तेजी से बढ़ने की वजह भी बहुत दिलचस्प है। एक हेक्टेयर में फैली रबर वाइन हर साल लाखों बीज पैदा कर सकती है। इसमें 95 फीसदी ताजे बीज अंकुरित होने लायक होते हैं। इनमें से ज्यादातर 6-8 महीने तक इस लायक बने रहते हैं। बहुत सूखे वाले हालात में ये ये एक साल के भीतर मर जाते हैं। पौधा विकसित होने के बाद जमीन के नीचे इसकी जड़ें 12 मीटर की गहराई तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते पूरी तरह विकसित पौधों को हटाना बहुत मुश्किल होता है।

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