Published : October 9, 2026 at 9:44 PM IST: इस घटनाक्रम पर आधिकारिक अपडेट दर्ज किया गया है। बुरहानपुर: महर्षि सांदीपनि का मध्य प्रदेश से गहरा आध्यात्मिक नाता रहा है. इसी प्रदेश के उज्जैन में उनका गुरुकुल आश्रम था, जहां भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा ने महर्षि सांदीपनि से शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी. महर्षि विशाल वट वृक्ष तले अपने शिष्यों को शिक्षा दिया करते थे. ये तो रही द्वापर युग की बात, मगर आज कलियुग में भी महर्षि सांदीपनि का यह शिक्षा मॉडल साकार हो रहा है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब प्राचीन शास्त्रों की जगह यहां आधुनिक शिक्षा ने जगह बना ली है.
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Published : October 9, 2026 at 9:44 PM IST
बुरहानपुर: महर्षि सांदीपनि का मध्य प्रदेश से गहरा आध्यात्मिक नाता रहा है. इसी प्रदेश के उज्जैन में उनका गुरुकुल आश्रम था, जहां भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा ने महर्षि सांदीपनि से शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी. महर्षि विशाल वट वृक्ष तले अपने शिष्यों को शिक्षा दिया करते थे. ये तो रही द्वापर युग की बात, मगर आज कलियुग में भी महर्षि सांदीपनि का यह शिक्षा मॉडल साकार हो रहा है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब प्राचीन शास्त्रों की जगह यहां आधुनिक शिक्षा ने जगह बना ली है.
इसमें रसायन शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, बॉटनी, जूलॉजी जैसी विज्ञान आधारित शिक्षा दी जाती है और शस्त्र की शिक्षा देकर योद्धा बनाने की जगह यहां बच्चों को शिक्षित बनाकर डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट जैसे योद्धा तैयार किए जाते हैं. इन सबके बीच बड़ी समानता यह है कि नर्सरी और प्राथमिक बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी सांदीपनि आश्रम की तरह ही विशाल देव वृक्ष वट यानि बरगद पेड़ के तले ही दी जा रही है.
100 साल पुराना बरगद का पेड़ आज भी जीवित अवस्था में संरक्षित
बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर शाहपुर तहसील क्षेत्र में इस शैक्षणिक सत्र से सांदीपनि विद्यालय संचालित हो रहा है. इस विद्यालय के लिए देशमुख परिवार ने करीब 15 एकड़ कृषि भूमि दान में दी है, इसमें से करीब सवा पांच एकड़ में सांदीपनि विद्यालय का निर्माण किया गया है. यहां सबसे बड़ी खासियत यह है कि करीब 100 साल पुराना बरगद का पेड़ आज भी जीवित अवस्था में संरक्षित कर रखा गया है.
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- •Published : October 9, 2026 at 9:44 PM IST
- •बुरहानपुर: महर्षि सांदीपनि का मध्य प्रदेश से गहरा आध्यात्मिक नाता रहा है. इसी प्रदेश के उज्जैन में उनका गुरुकुल आश्रम था, जहां भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा ने महर्षि सांदीपनि से शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी. महर्षि विशाल वट वृक्ष तले अपने शिष्यों को शिक्षा दिया करते थे. ये तो रही द्वापर युग की बात, मगर आज कलियुग में भी महर्षि सांदीपनि का यह शिक्षा मॉडल साकार हो रहा है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब प्राचीन शास्त्रों की जगह यहां आधुनिक शिक्षा ने जगह बना ली है.
- •इसमें रसायन शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, बॉटनी, जूलॉजी जैसी विज्ञान आधारित शिक्षा दी जाती है और शस्त्र की शिक्षा देकर योद्धा बनाने की जगह यहां बच्चों को शिक्षित बनाकर डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट जैसे योद्धा तैयार किए जाते हैं. इन सबके बीच बड़ी समानता यह है कि नर्सरी और प्राथमिक बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी सांदीपनि आश्रम की तरह ही विशाल देव वृक्ष वट यानि बरगद पेड़ के तले ही दी जा रही है.
- •100 साल पुराना बरगद का पेड़ आज भी जीवित अवस्था में संरक्षित
- •बुरहानपुर जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर शाहपुर तहसील क्षेत्र में इस शैक्षणिक सत्र से सांदीपनि विद्यालय संचालित हो रहा है. इस विद्यालय के लिए देशमुख परिवार ने करीब 15 एकड़ कृषि भूमि दान में दी है, इसमें से करीब सवा पांच एकड़ में सांदीपनि विद्यालय का निर्माण किया गया है. यहां सबसे बड़ी खासियत यह है कि करीब 100 साल पुराना बरगद का पेड़ आज भी जीवित अवस्था में संरक्षित कर रखा गया है.
- •इस पेड़ के इर्द-गिर्द नर्सरी से लेकर पहली और दूसरी की कक्षाएं लगती हैं. यहां के बच्चों को पेड़ के नीचे प्रकृति की गोद में आधुनिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है. इस दौरान आधुनिक शिक्षा और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है.
- •पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए बच्चों के मनोरंजन और एक्टिविटी की व्यवस्था
- •यहां बरगद के पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए, इसे चारों ओर से सुरक्षित किया गया है. यहां बच्चों के मनोरंजन और एक्टिविटी के लिए डिजाइन तैयार किया गया है. यहीं पर बच्चों को कहानियां, फुटबॉल, गेम्स सहित अन्य गतिविधियां कराई जाती हैं. इससे बच्चों का बौद्धिक विकास हो रहा है, बच्चे भी आसानी से खेल खेल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.
- •प्राथमिक शिक्षिका मीना महेंद्र महाजन ने बताया कि "इस विद्यालय में बच्चों को खेल खेल में आधुनिक शिक्षा का पाठ पढ़ाते हैं, करीब 100 साल पुराने पेड़ के नीचे बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियां से जोड़ा है, इससे बच्चों का बौद्धिक विकास हो रहा है. उन्हें अक्षर ज्ञान, गेमिंग और पीटी कराते हैं, साथ ही मनोरंजन के लिए भी तरह तरह की एक्टिविटी कराई जाती है."
- •बता दें कि शाहपुर में मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में शुमार सांदीपनि विद्यालय योजना को धरातल पर लागू किया गया है. यहां शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया है. इस विद्यालय को साई कंसल्टेंट्स ने डिजाइन किया है. इस ग्रुप ने पूरे मध्य प्रदेश में 276 विद्यालय विकसित किए हैं, इसमें सांदीपनि विद्यालय शाहपुर भी शामिल है.
प्रशासन की एडवाइजरी और सुरक्षा निर्देश
इस पेड़ के इर्द-गिर्द नर्सरी से लेकर पहली और दूसरी की कक्षाएं लगती हैं. यहां के बच्चों को पेड़ के नीचे प्रकृति की गोद में आधुनिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है. इस दौरान आधुनिक शिक्षा और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है.
पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए बच्चों के मनोरंजन और एक्टिविटी की व्यवस्था
यहां बरगद के पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए, इसे चारों ओर से सुरक्षित किया गया है. यहां बच्चों के मनोरंजन और एक्टिविटी के लिए डिजाइन तैयार किया गया है. यहीं पर बच्चों को कहानियां, फुटबॉल, गेम्स सहित अन्य गतिविधियां कराई जाती हैं. इससे बच्चों का बौद्धिक विकास हो रहा है, बच्चे भी आसानी से खेल खेल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.
प्राथमिक शिक्षिका मीना महेंद्र महाजन ने बताया कि "इस विद्यालय में बच्चों को खेल खेल में आधुनिक शिक्षा का पाठ पढ़ाते हैं, करीब 100 साल पुराने पेड़ के नीचे बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियां से जोड़ा है, इससे बच्चों का बौद्धिक विकास हो रहा है. उन्हें अक्षर ज्ञान, गेमिंग और पीटी कराते हैं, साथ ही मनोरंजन के लिए भी तरह तरह की एक्टिविटी कराई जाती है."
बता दें कि शाहपुर में मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में शुमार सांदीपनि विद्यालय योजना को धरातल पर लागू किया गया है. यहां शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया है. इस विद्यालय को साई कंसल्टेंट्स ने डिजाइन किया है. इस ग्रुप ने पूरे मध्य प्रदेश में 276 विद्यालय विकसित किए हैं, इसमें सांदीपनि विद्यालय शाहपुर भी शामिल है.
डिजाइन में धूप, बारिश और ठंड को लेकर विशेष इंतजाम
खास बात यह है कि भीषण गर्मी में भी बच्चों को प्राकृतिक हवा का आनंद मिलता है. विद्यालय में चौड़े बरामदे, प्राकृतिक रोशनी, हवा के आवागमन और आंगन आधारित वेंटिलेशन का इंतजाम किया गया है. बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में भी बेहतर काम हुआ है. यहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, इसी तरह ठंड से बचाव के भी प्रबंध किए गए हैं.
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
इस विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र और हितधारकों पर देखा जा रहा है। घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।



