Mars Moon News: मंगल ग्रह के दो चांद हैं- फोबोस और डीमोस. फोबोस (Phobos) करीब 22–27 किलोमीटर लंबा और डीमोस (Deimos): करीब 12–15 किलोमीटर लंबा है. लेकिन ये दोनों बने कैसे? क्या ये अंतरिक्ष में भटक रहे ऐसे एस्टेरॉयड थे, जिन्हें मंगल ने अपने गुरुत्वाकर्षण से पकड़ लिया? या फिर किसी विशाल टक्कर के बाद मंगल से निकले मलबे से इनका जन्म हुआ? वैज्ञानिकों के पास इन सवालों के दो जवाब हैं, लेकिन अब तक किसी एक सवाल का जवाब भी नहीं मिला है. जापान अब इसी रहस्य को सुलझाने की तैयारी कर रहा है. उसका एक खास स्पेसक्राफ्ट मंगल के चांद फोबोस से मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर लौटेगा. 10 ग्राम मिट्टी से खुलेगा रहस्य
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Mars Moon News: मंगल ग्रह के दो चांद हैं- फोबोस और डीमोस. फोबोस (Phobos) करीब 22–27 किलोमीटर लंबा और डीमोस (Deimos): करीब 12–15 किलोमीटर लंबा है. लेकिन ये दोनों बने कैसे? क्या ये अंतरिक्ष में भटक रहे ऐसे एस्टेरॉयड थे, जिन्हें मंगल ने अपने गुरुत्वाकर्षण से पकड़ लिया? या फिर किसी विशाल टक्कर के बाद मंगल से निकले मलबे से इनका जन्म हुआ? वैज्ञानिकों के पास इन सवालों के दो जवाब हैं, लेकिन अब तक किसी एक सवाल का जवाब भी नहीं मिला है. जापान अब इसी रहस्य को सुलझाने की तैयारी कर रहा है. उसका एक खास स्पेसक्राफ्ट मंगल के चांद फोबोस से मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर लौटेगा.
10 ग्राम मिट्टी से खुलेगा रहस्य
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने इसके लिए मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) मिशन तैयार किया है. इसका लक्ष्य मंगल के चांद फोबोस से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और दूसरे पदार्थ इकट्ठा करना है. इन नमूनों को धरती पर लाकर वैज्ञानिक लैब में उनकी जांच करेंगे. मिशन की योजना के मुताबिक, नमूने 2031 में धरती पर वापस लाए जाएंगे. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों की जांच से पता चल सकता है कि फोबोस और डीमोस का जन्म कैसे हुआ. इससे मंगल और उसके आसपास के अंतरिक्ष की शुरुआती कहानी समझने में भी मदद मिल सकती है.
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- •10 ग्राम मिट्टी से खुलेगा रहस्य
- •जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने इसके लिए मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) मिशन तैयार किया है. इसका लक्ष्य मंगल के चांद फोबोस से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और दूसरे पदार्थ इकट्ठा करना है. इन नमूनों को धरती पर लाकर वैज्ञानिक लैब में उनकी जांच करेंगे. मिशन की योजना के मुताबिक, नमूने 2031 में धरती पर वापस लाए जाएंगे. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों की जांच से पता चल सकता है कि फोबोस और डीमोस का जन्म कैसे हुआ. इससे मंगल और उसके आसपास के अंतरिक्ष की शुरुआती कहानी समझने में भी मदद मिल सकती है.
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ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।







