देश के शीर्ष 15 साइबर अपराध प्रभावित जिलों की सूची में झारखंड के चार जिले प्रमुखता से शामिल हुए हैं। साइबर ठगी के पुराने केंद्र जामताड़ा के बाद अब राज्य के अन्य क्षेत्र डिजिटल अपराध के नए केंद्रों के रूप में उभरे हैं। नए आंकड़ों के अनुसार देवघर जिला देश भर में साइबर अपराध के मामलों में तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया है, जबकि दुमका जिला चौदहवें स्थान पर आया है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने के मामले में गिरिडीह जिला देश के शीर्ष 15 जिलों में दसवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं ठगी की राशि को एटीएम द्वारा निकालने के नेटवर्क में धनबाद जिला देश में तेरहवें स्थान पर दर्ज हुआ है। साइबर ठगी का संजाल साइबर अपराध का आकलन चार प्रमुख पैमानों पर किया गया है। इनमें सर्वाधिक साइबर अपराध दर्ज होना, फर्जी मोबाइल सिम कार्ड जारी होना, किराए के बैंक खाते खोलना तथा ठगी की राशि को एटीएम और चेक से निकालना शामिल है। जामताड़ा के अलावा देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद जिलों में ये अवैध गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। देवघर में साइबर अपराध के सर्वाधिक मामले दर्ज होने से यह देश में तीसरे स्थान पर है। दुमका जिला अपराध दर के कारण चौदहवें स्थान पर है। फर्जी दस्तावेज से सिम कार्ड एक्टिवेट करने में गिरिडीह जिला देश में दसवें स्थान पर पहुंच चुका है। ठग गिरिडीह से जारी अवैध सिम से देश भर में लोगों को ठगते हैं। वहीं, धनबाद जिला ठगी की रकम को एटीएम से निकालने वाले गिरोहों के कारण देश में तेरहवें स्थान पर आ गया है। पड़ोसी राज्य बिहार और अन्य शहरों का रिपोर्ट में स्थान साइबर अपराध के इस नेटवर्क में पड़ोसी राज्य बिहार के विभिन्न जिले भी आगे हैं। बिहार का नवादा जिला देश भर में साइबर अपराध के मामलों में दूसरे स्थान पर है। नालंदा जिला साइबर अपराध में चौथे तथा फर्जी सिम जारी करने में दूसरे स्थान पर दर्ज हुआ है। बिहार की राजधानी पटना साइबर मामलों में नौवें स्थान पर, ठगी की रकम निकालने में दूसरे स्थान पर और किराए के खातों के उपयोग में नौवें स्थान पर है। इसके अलावा बिहार का अरवल जिला फर्जी सिम कार्ड जारी करने में चौथे स्थान पर दर्ज किया गया है। पश्चिम बंगाल का कोलकाता शहर ठगी की रकम को एटीएम और चेक से निकालने में पूरे देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। फर्जी दस्तावेज और खातों से पनपता अपराध साइबर अपराधी अपनी ठगी का जाल फैलाने के लिए फर्जी मोबाइल सिम कार्ड और फर्जी बैंक खातों का प्रयोग करते हैं। जाली पहचान पत्रों या निर्दोष लोगों के असली दस्तावेज के आधार पर सिम कार्ड जारी करवा लिए जाते हैं, जिससे अपराधियों की पहचान छिपाने में आसानी होती है। इसके बाद, ठगी की गई रकम को विभिन्न किराए के बैंक खातों में स्थानांतरित करके एटीएम और चेक के जरिये निकाल लिया जाता है। पुलिस तथा जांच एजेंसियों के लिए इन कड़ियों को जोड़ना और इस संगठित नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन रहा है।
पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने
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- •देश के शीर्ष 15 साइबर अपराध प्रभावित जिलों की सूची में झारखंड के चार जिले प्रमुखता से शामिल हुए हैं। साइबर ठगी के पुराने केंद्र जामताड़ा के बाद अब राज्य के अन्य क्षेत्र डिजिटल अपराध के नए केंद्रों के रूप में उभरे हैं। नए आंकड़ों के अनुसार देवघर जिला देश भर में साइबर अपराध के मामलों में तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया है, जबकि दुमका जिला चौदहवें स्थान पर आया है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने के मामले में गिरिडीह जिला देश के शीर्ष 15 जिलों में दसवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं ठगी की राशि को एटीएम द्वारा निकालने के नेटवर्क में धनबाद जिला देश में तेरहवें स्थान पर दर्ज हुआ है। साइबर ठगी का संजाल साइबर अपराध का आकलन चार प्रमुख पैमानों पर किया गया है। इनमें सर्वाधिक साइबर अपराध दर्ज होना, फर्जी मोबाइल सिम कार्ड जारी होना, किराए के बैंक खाते खोलना तथा ठगी की राशि को एटीएम और चेक से निकालना शामिल है। जामताड़ा के अलावा देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद जिलों में ये अवैध गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। देवघर में साइबर अपराध के सर्वाधिक मामले दर्ज होने से यह देश में तीसरे स्थान पर है। दुमका जिला अपराध दर के कारण चौदहवें स्थान पर है। फर्जी दस्तावेज से सिम कार्ड एक्टिवेट करने में गिरिडीह जिला देश में दसवें स्थान पर पहुंच चुका है। ठग गिरिडीह से जारी अवैध सिम से देश भर में लोगों को ठगते हैं। वहीं, धनबाद जिला ठगी की रकम को एटीएम से निकालने वाले गिरोहों के कारण देश में तेरहवें स्थान पर आ गया है। पड़ोसी राज्य बिहार और अन्य शहरों का रिपोर्ट में स्थान साइबर अपराध के इस नेटवर्क में पड़ोसी राज्य बिहार के विभिन्न जिले भी आगे हैं। बिहार का नवादा जिला देश भर में साइबर अपराध के मामलों में दूसरे स्थान पर है। नालंदा जिला साइबर अपराध में चौथे तथा फर्जी सिम जारी करने में दूसरे स्थान पर दर्ज हुआ है। बिहार की राजधानी पटना साइबर मामलों में नौवें स्थान पर, ठगी की रकम निकालने में दूसरे स्थान पर और किराए के खातों के उपयोग में नौवें स्थान पर है। इसके अलावा बिहार का अरवल जिला फर्जी सिम कार्ड जारी करने में चौथे स्थान पर दर्ज किया गया है। पश्चिम बंगाल का कोलकाता शहर ठगी की रकम को एटीएम और चेक से निकालने में पूरे देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। फर्जी दस्तावेज और खातों से पनपता अपराध साइबर अपराधी अपनी ठगी का जाल फैलाने के लिए फर्जी मोबाइल सिम कार्ड और फर्जी बैंक खातों का प्रयोग करते हैं। जाली पहचान पत्रों या निर्दोष लोगों के असली दस्तावेज के आधार पर सिम कार्ड जारी करवा लिए जाते हैं, जिससे अपराधियों की पहचान छिपाने में आसानी होती है। इसके बाद, ठगी की गई रकम को विभिन्न किराए के बैंक खातों में स्थानांतरित करके एटीएम और चेक के जरिये निकाल लिया जाता है। पुलिस तथा जांच एजेंसियों के लिए इन कड़ियों को जोड़ना और इस संगठित नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन रहा है।
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