JP University : जय प्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) में उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता विषय पर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ. विश्वविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सहयोग से तथा राज्यपाल सचिवालय, राजभवन, पटना के प्रायोजन में किया जा रहा है. कार्यक्रम की अध्यक्षता जेपीयू के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने की. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के कुलपति प्रो. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल सचिवालय, पटना के अकादमिक सलाहकार प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे.

## मैदान पर क्या हुआ: मुख्य घटनाक्रम और खेल का रुख

JP University : जय प्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) में उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता विषय पर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ. विश्वविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सहयोग से तथा राज्यपाल सचिवालय, राजभवन, पटना के प्रायोजन में किया जा रहा है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता जेपीयू के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने की. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के कुलपति प्रो. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल सचिवालय, पटना के अकादमिक सलाहकार प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे.

मुख्य अतिथि प्रो. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता और समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर देखने की समग्र दृष्टि रही है. उच्च शिक्षा में इस प्रणाली को शामिल करने से शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपनी ज्ञान परंपरा की गहराई समझने तथा उसे आधुनिक संदर्भों में उपयोग करने का अवसर मिलेगा. उन्होंने इस विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की.

## खिलाड़ियों का प्रदर्शन और मैच के अहम आंकड़े

• JP University : जय प्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) में उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता विषय पर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ. विश्वविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सहयोग से तथा राज्यपाल सचिवालय, राजभवन, पटना के प्रायोजन में किया जा रहा है. • कार्यक्रम की अध्यक्षता जेपीयू के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने की. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के कुलपति प्रो. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल सचिवालय, पटना के अकादमिक सलाहकार प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे. • मुख्य अतिथि प्रो. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता और समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर देखने की समग्र दृष्टि रही है. उच्च शिक्षा में इस प्रणाली को शामिल करने से शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपनी ज्ञान परंपरा की गहराई समझने तथा उसे आधुनिक संदर्भों में उपयोग करने का अवसर मिलेगा. उन्होंने इस विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की. • विशिष्ट अतिथि प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक सोच, तार्किकता, अनुभव और मानव कल्याण की भावना का विशेष स्थान रहा है. उन्होंने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों का अध्ययन करने और उसे विद्यार्थियों तक पहुंचाने का आह्वान किया. साथ ही आधुनिक उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के साथ इसका सार्थक समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया. • कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैज्ञानिक और दार्शनिक पक्षों तथा वर्तमान उच्च शिक्षा में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन ज्ञान का संकलन नहीं है, बल्कि इसमें विज्ञान, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, दर्शन, पर्यावरण और जीवन-दर्शन से संबंधित व्यापक दृष्टिकोण निहित है. आवश्यकता है कि इस ज्ञान को आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान से जोड़ा जाए. • कार्यक्रम का स्वागत संबोधन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के नोडल ऑफिसर प्रो. एम. सरफराज अहमद ने किया. उन्होंने अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं महत्व की जानकारी दी. वहीं, विश्वविद्यालय के डीन छात्र कल्याण प्रो. राणा विक्रम सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की. मंच संचालन डॉ. अर्चना उपाध्याय ने किया. • कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, डीन, पदाधिकारी और प्रतिभागी उपस्थित रहे. इनमें प्रो. हरिश्चंद्र, प्रो. सैयद रज़ा, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. शाची मिश्रा, डॉ. विद्याधर सिंह, डॉ. होशियार सिंह मुंड और डॉ. सुनीता सिंह सहित अन्य शिक्षक एवं पदाधिकारी शामिल थे. कार्यक्रम के अंत में डॉ. आंचल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. • देश , एजुकेशन , मनोरंजन , बिजनेस अपडेट , धर्म , क्रिकेट , राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

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