Hardoi News: हरदोई, संवाददाता। बदलते मौसम के साथ टांसिल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसकी चपेट में आने वाले लोगों को गले में दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम की परेशानी हो रही है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण कानों तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और समय से उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। हरदोई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। यहां रोजाना करीब 350 से 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें लगभग 20 फीसदी मरीज टांसिल संक्रमण से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। टांसिल संक्रमण होने पर मरीज को तेज बुखार के साथ गले में दर्द और निगलने में परेशानी हो सकती है। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर कान में दर्द जैसी शिकायत भी सामने आती है। डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि टांसिल गले के दोनों ओर मौजूद ऊतक होते हैं। इनमें संक्रमण होने पर सूजन आ जाती है। कई बार वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण इसकी वजह बनता है। मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम और गले में खराश की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में लक्षण बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गले में लगातार दर्द, तेज बुखार या कान में दर्द होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर जांच और उचित इलाज से परेशानी को बढ़ने से रोका जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण गंभीर होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम का ताजा हाल: किन इलाकों में दिखा बड़ा असर?
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Hardoi News: हरदोई, संवाददाता। बदलते मौसम के साथ टांसिल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसकी चपेट में आने वाले लोगों को गले में दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम की परेशानी हो रही है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण कानों तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और समय से उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। हरदोई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। यहां रोजाना करीब 350 से 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें लगभग 20 फीसदी मरीज टांसिल संक्रमण से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। टांसिल संक्रमण होने पर मरीज को तेज बुखार के साथ गले में दर्द और निगलने में परेशानी हो सकती है। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर कान में दर्द जैसी शिकायत भी सामने आती है।
डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि टांसिल गले के दोनों ओर मौजूद ऊतक होते हैं। इनमें संक्रमण होने पर सूजन आ जाती है। कई बार वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण इसकी वजह बनता है। मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम और गले में खराश की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में लक्षण बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गले में लगातार दर्द, तेज बुखार या कान में दर्द होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर जांच और उचित इलाज से परेशानी को बढ़ने से रोका जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण गंभीर होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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लक्षण गंभीर हों, सांस लेने या लार निगलने में परेशानी हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
तापमान, बारिश और मौसम विभाग के आंकड़े
- •Hardoi News: हरदोई, संवाददाता। बदलते मौसम के साथ टांसिल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसकी चपेट में आने वाले लोगों को गले में दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम की परेशानी हो रही है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण कानों तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और समय से उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। हरदोई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। यहां रोजाना करीब 350 से 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें लगभग 20 फीसदी मरीज टांसिल संक्रमण से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। टांसिल संक्रमण होने पर मरीज को तेज बुखार के साथ गले में दर्द और निगलने में परेशानी हो सकती है। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर कान में दर्द जैसी शिकायत भी सामने आती है।
- •डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि टांसिल गले के दोनों ओर मौजूद ऊतक होते हैं। इनमें संक्रमण होने पर सूजन आ जाती है। कई बार वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण इसकी वजह बनता है। मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम और गले में खराश की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में लक्षण बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गले में लगातार दर्द, तेज बुखार या कान में दर्द होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर जांच और उचित इलाज से परेशानी को बढ़ने से रोका जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण गंभीर होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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- •लक्षण गंभीर हों, सांस लेने या लार निगलने में परेशानी हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।





