आंध्र प्रदेश के गुंटूर में डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमण से प्रभावित कृत्रिम घुटने के जोड़ का उपचार बैक्टीरियोफेज की मदद से किया। 72 वर्षीय मरीज के मामले को भारत में कार्बापेनेम-प्रतिरोधी कृत्रिम जोड़ संक्रमण के लिए फेज उपचार की पहली सफल रिपोर्ट बताया गया है। यह मामला 22 अक्टूबर 2026 को ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इन्फेक्शस डिजीजेज़: आईजेडी रीजन’ में प्रकाशित हुआ। बैक्टीरियोफेज ऐसे विषाणु हैं जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और उनके भीतर अपनी संख्या बढ़ाते हैं। कई फेज किसी खास जीवाणु प्रजाति या उसके विशिष्ट प्रकार को ही निशाना बनाते हैं। इसलिए उपचार चुनने से पहले संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है। जीवाणुनाशी फेज जीवाणु कोशिका के भीतर बढ़ते हैं और अंततः उसे फोड़ देते हैं।

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

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आंध्र प्रदेश के गुंटूर में डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमण से प्रभावित कृत्रिम घुटने के जोड़ का उपचार बैक्टीरियोफेज की मदद से किया। 72 वर्षीय मरीज के मामले को भारत में कार्बापेनेम-प्रतिरोधी कृत्रिम जोड़ संक्रमण के लिए फेज उपचार की पहली सफल रिपोर्ट बताया गया है। यह मामला 22 अक्टूबर 2026 को ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इन्फेक्शस डिजीजेज़: आईजेडी रीजन’ में प्रकाशित हुआ।

बैक्टीरियोफेज ऐसे विषाणु हैं जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और उनके भीतर अपनी संख्या बढ़ाते हैं। कई फेज किसी खास जीवाणु प्रजाति या उसके विशिष्ट प्रकार को ही निशाना बनाते हैं। इसलिए उपचार चुनने से पहले संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है। जीवाणुनाशी फेज जीवाणु कोशिका के भीतर बढ़ते हैं और अंततः उसे फोड़ देते हैं।

गुंटूर के मरीज के कृत्रिम घुटने में स्यूडोमोनास एरुगिनोसा नामक जीवाणु का संक्रमण था। यह जीवाणु कार्बापेनेम सहित कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। कार्बापेनेम गंभीर जीवाणु संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली व्यापक प्रभाव वाली बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक दवाओं का वर्ग है। इनके विरुद्ध प्रतिरोध बढ़ने पर उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

मरीज के घुटने का कृत्रिम जोड़ जून 2025 में हुई शल्यक्रिया के बाद संक्रमित हो गया था। आंध्र प्रदेश स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय की फेज प्रयोगशाला ने संक्रमणकारी जीवाणु के अनुरूप तीन विशिष्ट बैक्टीरियोफेज का मिश्रण तैयार किया। डॉ. कल्याण चक्रवर्ती कोगंती के नेतृत्व वाली चिकित्सकीय टीम ने यह मिश्रण 10 दिनों तक सीधे संक्रमित जोड़ में दिया।

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •आंध्र प्रदेश के गुंटूर में डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमण से प्रभावित कृत्रिम घुटने के जोड़ का उपचार बैक्टीरियोफेज की मदद से किया। 72 वर्षीय मरीज के मामले को भारत में कार्बापेनेम-प्रतिरोधी कृत्रिम जोड़ संक्रमण के लिए फेज उपचार की पहली सफल रिपोर्ट बताया गया है। यह मामला 22 अक्टूबर 2026 को ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इन्फेक्शस डिजीजेज़: आईजेडी रीजन’ में प्रकाशित हुआ।
  • •बैक्टीरियोफेज ऐसे विषाणु हैं जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और उनके भीतर अपनी संख्या बढ़ाते हैं। कई फेज किसी खास जीवाणु प्रजाति या उसके विशिष्ट प्रकार को ही निशाना बनाते हैं। इसलिए उपचार चुनने से पहले संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है। जीवाणुनाशी फेज जीवाणु कोशिका के भीतर बढ़ते हैं और अंततः उसे फोड़ देते हैं।
  • •गुंटूर के मरीज के कृत्रिम घुटने में स्यूडोमोनास एरुगिनोसा नामक जीवाणु का संक्रमण था। यह जीवाणु कार्बापेनेम सहित कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। कार्बापेनेम गंभीर जीवाणु संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली व्यापक प्रभाव वाली बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक दवाओं का वर्ग है। इनके विरुद्ध प्रतिरोध बढ़ने पर उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
  • •मरीज के घुटने का कृत्रिम जोड़ जून 2025 में हुई शल्यक्रिया के बाद संक्रमित हो गया था। आंध्र प्रदेश स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय की फेज प्रयोगशाला ने संक्रमणकारी जीवाणु के अनुरूप तीन विशिष्ट बैक्टीरियोफेज का मिश्रण तैयार किया। डॉ. कल्याण चक्रवर्ती कोगंती के नेतृत्व वाली चिकित्सकीय टीम ने यह मिश्रण 10 दिनों तक सीधे संक्रमित जोड़ में दिया।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।