उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसके तहत कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनाया जाएगा। कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनेगा।
घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसके तहत कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनाया जाएगा।
कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनेगा।
निवेशकों को 10 साल तक बिजली शुल्क में शत-प्रतिशत छूट मिलेगी।
यूपीनेडा नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि अवशेषों व कचरे से हवाई जहाज के लिए हरित ईंधन तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु
- •उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसके तहत कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनाया जाएगा।
- •कृषि अवशेषों से हवाई जहाजों के लिए हरित ईंधन बनेगा।
- •निवेशकों को 10 साल तक बिजली शुल्क में शत-प्रतिशत छूट मिलेगी।
- •यूपीनेडा नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगी।
- •राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि अवशेषों व कचरे से हवाई जहाज के लिए हरित ईंधन तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
- •नीति में निवेश के आधार पर एसएएफ विनिर्माण इकाइयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक के पूंजी निवेश वाली इकाइयों को वृहद श्रेणी, 500 करोड़ से 1500 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयों को मेगा और 1500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली इकाइयों को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में रखा जाएगा।
- •नीति के तहत इकाइयों को स्टांप शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार और विकास शुल्क में छूट, राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी तथा कौशल विकास अनुदान जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
- •इसके अलावा, 10 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति और भूमि आवंटन की स्थिति में शुरुआती भूमि सब्सिडी का भी प्रविधान किया गया है। गन्ने की खेती और एथेनाल उत्पादन में अग्रणी होने के कारण उत्तर प्रदेश में दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल से विमानन ईंधन बनाने वाली तकनीकों के विकास की व्यापक संभावना हैं।
- •नीति के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आवेदनों के मूल्यांकन के लिए निदेशक स्तर पर समिति गठित होगी। यह नीति पांच वर्षों तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।
- •यह भी पढ़ें- विंध्य एक्सप्रेस-वे: मीरजापुर के 35 गांवों के किसानों की बल्ले-बल्ले, मिलेगा 4 गुना मुआवजा
आधिकारिक कार्रवाई और आगे की स्थिति
नीति में निवेश के आधार पर एसएएफ विनिर्माण इकाइयों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक के पूंजी निवेश वाली इकाइयों को वृहद श्रेणी, 500 करोड़ से 1500 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयों को मेगा और 1500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली इकाइयों को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में रखा जाएगा।
नीति के तहत इकाइयों को स्टांप शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार और विकास शुल्क में छूट, राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी तथा कौशल विकास अनुदान जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
इसके अलावा, 10 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति और भूमि आवंटन की स्थिति में शुरुआती भूमि सब्सिडी का भी प्रविधान किया गया है। गन्ने की खेती और एथेनाल उत्पादन में अग्रणी होने के कारण उत्तर प्रदेश में दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल से विमानन ईंधन बनाने वाली तकनीकों के विकास की व्यापक संभावना हैं।
नीति के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। आवेदनों के मूल्यांकन के लिए निदेशक स्तर पर समिति गठित होगी। यह नीति पांच वर्षों तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।
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ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।