काशी विश्वनाथ मंदिर के प्राचीन पत्थरों के क्षरण का कारण जानने के लिए आईआईटी मद्रास की टीम 5 नवंबर को वाराणसी आएगी। यह टीम आधुनिक उपकरणों से तकनीकी परीक्षण कर पत्थरों को सुरक्षित रखने और टूटे स्वर्ण मंडित शिखर की पुनर्स्थापना की योजना बनाएगी। चेन्नई: फ्रीजर और स्टेनलेस स्टील के लिक्विड नाइट्रोजन टैंकों से भरे एक ठंडे कमरे में नंगे पैर चलते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एस. महालिंगम इन डिब्बों की ओर इशारा करते हैं और सात तक गिनते हैं.

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

काशी विश्वनाथ मंदिर के प्राचीन पत्थरों के क्षरण का कारण जानने के लिए आईआईटी मद्रास की टीम 5 नवंबर को वाराणसी आएगी। यह टीम आधुनिक उपकरणों से तकनीकी परीक्षण कर पत्थरों को सुरक्षित रखने और टूटे स्वर्ण मंडित शिखर की पुनर्स्थापना की योजना बनाएगी।

चेन्नई: फ्रीजर और स्टेनलेस स्टील के लिक्विड नाइट्रोजन टैंकों से भरे एक ठंडे कमरे में नंगे पैर चलते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एस. महालिंगम इन डिब्बों की ओर इशारा करते हैं और सात तक गिनते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने चेन्नई के 12 से ज्यादा अस्पतालों के मरीजों से कैंसर के करीब 10,000 टिशू सैंपल इकट्ठा किए हैं.” टिशू के इन सैंपल को लिक्विड नाइट्रोजन के सात टैंकों में रखा गया है. वहीं, अलग-अलग फ्रीजर में, जहां तापमान बहुत कम रखा जाता है, खून के अलग-अलग हिस्सों और ट्यूमर के टिशू से निकाले गए DNA और RNA को रखा गया है.

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •काशी विश्वनाथ मंदिर के प्राचीन पत्थरों के क्षरण का कारण जानने के लिए आईआईटी मद्रास की टीम 5 नवंबर को वाराणसी आएगी। यह टीम आधुनिक उपकरणों से तकनीकी परीक्षण कर पत्थरों को सुरक्षित रखने और टूटे स्वर्ण मंडित शिखर की पुनर्स्थापना की योजना बनाएगी।
  • •चेन्नई: फ्रीजर और स्टेनलेस स्टील के लिक्विड नाइट्रोजन टैंकों से भरे एक ठंडे कमरे में नंगे पैर चलते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एस. महालिंगम इन डिब्बों की ओर इशारा करते हैं और सात तक गिनते हैं.
  • •उन्होंने कहा, “हमने चेन्नई के 12 से ज्यादा अस्पतालों के मरीजों से कैंसर के करीब 10,000 टिशू सैंपल इकट्ठा किए हैं.” टिशू के इन सैंपल को लिक्विड नाइट्रोजन के सात टैंकों में रखा गया है. वहीं, अलग-अलग फ्रीजर में, जहां तापमान बहुत कम रखा जाता है, खून के अलग-अलग हिस्सों और ट्यूमर के टिशू से निकाले गए DNA और RNA को रखा गया है.

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। किसी भी नए आधिकारिक अपडेट की पुष्टि होते ही जानकारी साझा की जाएगी।