बच्चों और युवाओं को नशे और अपराध से दूर रखने के उद्देश्य से 'नशा मुक्त भारत' की ओर से बुधवार को मानसी प्रखंड स्थित अमनी मध्य विद्यालय में निशुल्क शतरंज प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं निशुल्क शतरंज प्रशिक्षक प्रेम कुमार यशवंत ने 40 बालक-बालिकाओं को शतरंज के मोहरों के नाम, उनकी चाल और खेल के बुनियादी नियमों की विस्तार से जानकारी दी। प्रेम कुमार यशवंत ने कहा कि खेल बच्चों और युवाओं को भटकाव से बचाने का सशक्त माध्यम है। शतरंज से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

बच्चों और युवाओं को नशे और अपराध से दूर रखने के उद्देश्य से 'नशा मुक्त भारत' की ओर से बुधवार को मानसी प्रखंड स्थित अमनी मध्य विद्यालय में निशुल्क शतरंज प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं निशुल्क शतरंज प्रशिक्षक प्रेम कुमार यशवंत ने 40 बालक-बालिकाओं को शतरंज के मोहरों के नाम, उनकी चाल और खेल के बुनियादी नियमों की विस्तार से जानकारी दी।

प्रेम कुमार यशवंत ने कहा कि खेल बच्चों और युवाओं को भटकाव से बचाने का सशक्त माध्यम है। शतरंज से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में खेल के प्रति रुचि जगाना और उन्हें नशे के मकड़जाल से दूर रखना है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 सप्ताह से विभिन्न विद्यालयों में हर हफ्ते एक दिन निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •बच्चों और युवाओं को नशे और अपराध से दूर रखने के उद्देश्य से 'नशा मुक्त भारत' की ओर से बुधवार को मानसी प्रखंड स्थित अमनी मध्य विद्यालय में निशुल्क शतरंज प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं निशुल्क शतरंज प्रशिक्षक प्रेम कुमार यशवंत ने 40 बालक-बालिकाओं को शतरंज के मोहरों के नाम, उनकी चाल और खेल के बुनियादी नियमों की विस्तार से जानकारी दी।
  • •प्रेम कुमार यशवंत ने कहा कि खेल बच्चों और युवाओं को भटकाव से बचाने का सशक्त माध्यम है। शतरंज से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
  • •इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में खेल के प्रति रुचि जगाना और उन्हें नशे के मकड़जाल से दूर रखना है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 सप्ताह से विभिन्न विद्यालयों में हर हफ्ते एक दिन निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।