अल्मोड़ा। पहाड़ों में पर्याप्त धूप उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी सामने आ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा में जांच के लिए आने वाले हर 10 में से आठ बच्चों में इन पोषक तत्वों की कमी मिलने का दावा किया गया है। बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चों की बदलती दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों को लेकर चिंता जताई है।चिकित्सकों के अनुसार, पहले पहाड़ों में बच्चे मैदानों, खेतों और पगडंडियों पर खेलते थे, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियां बनी रहती थीं। अब बड़ी संख्या में बच्चे घरों के भीतर मोबाइल, कंप्यूटर, ऑनलाइन गेम और टीवी पर अधिक समय बिता रहे हैं। इससे बाहरी गतिविधियों और धूप के संपर्क में रहने का समय घट रहा है। पर्याप्त धूप न मिलने से शरीर में विटामिन-डी का निर्माण प्रभावित हो सकता है। विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के विकास में अहम भूमिका निभाता है।--पारंपरिक खानपान से दूरी भी चिंता का विषयबच्चों के खानपान में भी बदलाव आया है। मडुआ, झंगोरा, हरी सब्जियां, दूध और दही जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों की जगह चाउमीन, बर्गर, मोमोज, पिज्जा और पैकेट बंद स्नैक्स का सेवन बढ़ रहा है। संतुलित आहार की कमी से बच्चों को हड्डियों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन-डी और कैल्शियम की गंभीर या लंबे समय तक बनी रहने वाली कमी से बच्चों की हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है। बचपन में विटामिन-डी की गंभीर कमी से रिकेट्स जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है। इसलिए समय रहते बच्चों की दिनचर्या और खानपान में सुधार करना जरूरी है।---रोज एक घंटा खेलकूद के लिए निकालेंबाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उन्हें प्रतिदिन कम से कम एक घंटा बाहरी खेलों व शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। बच्चों के भोजन में दूध-दही, हरी सब्जियां और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। धूप में समय बिताने और विटामिन-डी की कमी की आशंका होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर भी जोर दिया गया है।---कोटओपीडी में जांच के लिए आने वाले हर 10 में से आठ बच्चों में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी मिलना चिंताजनक है। अभिभावकों को बच्चों की दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देना चाहिए, ताकि उनकी हड्डियों का समुचित विकास हो सके।-डॉ. सुमित जीना, बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात शिशु सुपर स्पेशलिस्ट, बेस अस्पताल/राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा
मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु
💡 यह भी पढ़ें: Kannauj News: [मौसम बदलने से बच्चों में खांसी-जुकाम और वायरल बुखार बढ़ा](/article/kannauj-news-mausam-badalane-se-bachchon-mein-khansijukam-aur-a191)
- •अल्मोड़ा। पहाड़ों में पर्याप्त धूप उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी सामने आ रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा में जांच के लिए आने वाले हर 10 में से आठ बच्चों में इन पोषक तत्वों की कमी मिलने का दावा किया गया है। बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चों की बदलती दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों को लेकर चिंता जताई है।चिकित्सकों के अनुसार, पहले पहाड़ों में बच्चे मैदानों, खेतों और पगडंडियों पर खेलते थे, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियां बनी रहती थीं। अब बड़ी संख्या में बच्चे घरों के भीतर मोबाइल, कंप्यूटर, ऑनलाइन गेम और टीवी पर अधिक समय बिता रहे हैं। इससे बाहरी गतिविधियों और धूप के संपर्क में रहने का समय घट रहा है। पर्याप्त धूप न मिलने से शरीर में विटामिन-डी का निर्माण प्रभावित हो सकता है। विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के विकास में अहम भूमिका निभाता है।--पारंपरिक खानपान से दूरी भी चिंता का विषयबच्चों के खानपान में भी बदलाव आया है। मडुआ, झंगोरा, हरी सब्जियां, दूध और दही जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों की जगह चाउमीन, बर्गर, मोमोज, पिज्जा और पैकेट बंद स्नैक्स का सेवन बढ़ रहा है। संतुलित आहार की कमी से बच्चों को हड्डियों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन-डी और कैल्शियम की गंभीर या लंबे समय तक बनी रहने वाली कमी से बच्चों की हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है। बचपन में विटामिन-डी की गंभीर कमी से रिकेट्स जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है। इसलिए समय रहते बच्चों की दिनचर्या और खानपान में सुधार करना जरूरी है।---रोज एक घंटा खेलकूद के लिए निकालेंबाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उन्हें प्रतिदिन कम से कम एक घंटा बाहरी खेलों व शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। बच्चों के भोजन में दूध-दही, हरी सब्जियां और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। धूप में समय बिताने और विटामिन-डी की कमी की आशंका होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर भी जोर दिया गया है।---कोटओपीडी में जांच के लिए आने वाले हर 10 में से आठ बच्चों में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी मिलना चिंताजनक है। अभिभावकों को बच्चों की दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देना चाहिए, ताकि उनकी हड्डियों का समुचित विकास हो सके।-डॉ. सुमित जीना, बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात शिशु सुपर स्पेशलिस्ट, बेस अस्पताल/राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
इस घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर समीक्षा जारी है। ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर विवरण को अद्यतन किया जाएगा।






