उत्तराखंड सरकार पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी कर रही है। पिथौरागढ़ की तीन घाटियों में 108.8 मेगावाट क्षमता विकसित करने की तैयारी।

## घटनाक्रम का विस्तृत विवरण

उत्तराखंड सरकार पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी कर रही है।

पिथौरागढ़ की तीन घाटियों में 108.8 मेगावाट क्षमता विकसित करने की तैयारी।

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

## मुख्य सत्यापित तथ्य व बिंदु

• उत्तराखंड सरकार पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी कर रही है। • पिथौरागढ़ की तीन घाटियों में 108.8 मेगावाट क्षमता विकसित करने की तैयारी। • जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में • राज्य ब्यूरो, देहरादून। बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार जलविद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है। पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी है। • ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से राज्य को बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी और केंद्रीय पूल तथा बिजली बाजार से अतिरिक्त बिजली लेने की निर्भरता भी कम की जा सकेगी। • यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में बिजली संकट: टोंस में 59 और यमुना में 49% घटा पानी, उत्पादन में मुश्किल • उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ईस्टर्न रामगंगा, गोरीगंगा और धौलीगंगा घाटियों में सातों लघु जलविद्युत परियोजनाओं को विकसित कराएगा। इनमें मुवानी (15 मेगावाट), कामतौली (14 मेगावाट), जिम्बामराम (21 मेगावाट), प्युंशानी (12 मेगावाट), बालगाड़ (19.8 मेगावाट), पैनागाड़ ए (12 मेगावाट) और मंडप (15 मेगावाट) की परियोजनाएं शामिल हैं। • इनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 108.8 मेगावाट है। परियोजनाओं का विकास लघु जलविद्युत नीति के तहत 2 से 25 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए तय व्यवस्था के अनुसार निर्माण, स्वामित्व व संचालन के आधार पर किया जाएगा।

## महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि व विवरण

राज्य ब्यूरो, देहरादून। बिजली की बढ़ती मांग और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार जलविद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है। पिथौरागढ़ की तीन नदी घाटियों में सात लघु जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से 108.8 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की तैयारी है।

ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से राज्य को बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी और केंद्रीय पूल तथा बिजली बाजार से अतिरिक्त बिजली लेने की निर्भरता भी कम की जा सकेगी।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में बिजली संकट: टोंस में 59 और यमुना में 49% घटा पानी, उत्पादन में मुश्किल

उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ईस्टर्न रामगंगा, गोरीगंगा और धौलीगंगा घाटियों में सातों लघु जलविद्युत परियोजनाओं को विकसित कराएगा। इनमें मुवानी (15 मेगावाट), कामतौली (14 मेगावाट), जिम्बामराम (21 मेगावाट), प्युंशानी (12 मेगावाट), बालगाड़ (19.8 मेगावाट), पैनागाड़ ए (12 मेगावाट) और मंडप (15 मेगावाट) की परियोजनाएं शामिल हैं।

इनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 108.8 मेगावाट है। परियोजनाओं का विकास लघु जलविद्युत नीति के तहत 2 से 25 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए तय व्यवस्था के अनुसार निर्माण, स्वामित्व व संचालन के आधार पर किया जाएगा।

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‘नई परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्धता बढ़ने के साथ मांग के समय ग्रिड पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। परियोजनाओं के निर्माण से पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। सड़क और परिवहन जैसी स्थानीय सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी। सरकार बड़े जलविद्युत प्रोजेक्टों के साथ पंप्ड स्टोरेज, बैटरी स्टोरेज और लघु जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर उत्पादन के साथ ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है।’ - आर मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव ऊर्जा

## आम जनता, क्षेत्र या उद्योग पर क्या होगा असर?

इस संपूर्ण विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र, बाजार और आम नागरिकों की दैनिक गतिविधियों पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इस तरह के नीतिगत और संस्थागत बदलावों से पारदर्शिता और कार्यकुशलता में सुधार देखने को मिलता है।

## तथ्यात्मक संदर्भ व पुष्टि

यह विशेष रिपोर्ट आधिकारिक सार्वजनिक दस्तावेजों, प्रेस वक्तव्यों और पुष्ट सूचनाओं के आधार पर संकलित की गई है। संपादकीय सत्यापन मानकों के अनुसार राज्य समाचार द्वारा रिपोर्ट किए गए तथ्यों को बिना किसी अनुमान या अप्रमाणित दावों के प्रस्तुत किया गया है।