उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले का लहुरियादह गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही पथरीला और उपेक्षित गांव है जहां पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने अथक प्रयास करके पहली बार नल से पीने का पानी पहुंचाया था।
पानी की समस्या हल होने के बाद गांव के नौनिहालों के लिए पहली बार एक पक्के स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन अब इस पर वन विभाग ने कानूनी अड़ंगा लगा दिया है।
## वन विभाग का पक्ष और ग्रामीणों का दर्द
वन विभाग का दावा है कि जिस भूखंड पर स्कूल की नींव खोदी जा रही है, वह वन संरक्षण अधिनियम के तहत अधिसूचित वन क्षेत्र में आता है। विभाग के अनुसार बिना केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के यहां कोई गैर-वानिकी निर्माण नहीं हो सकता।
दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों को स्कूल जाने के लिए 7 से 8 किलोमीटर पथरीले जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। स्कूल निर्माण रुकने से पूरे गांव में घोर निराशा का माहौल है।
## प्रशासनिक समन्वय और समाधान के प्रयास
जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है:
- **संयुक्त पैमाइश:** वन विभाग और राजस्व विभाग को मिलकर सीमांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। - **वैकल्पिक भूमि:** यदि प्रस्तावित भूमि वन क्षेत्र में पाई जाती है, तो गांव के पास ग्राम समाज की अन्य भूमि तुरंत चिन्हित कर स्कूल निर्माण पुनः शुरू कराया जाएगा।
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