'जिनकी अवैध कमाई बंद हो गई, वे मुझे प्यार करेंगे क्या'; SIR विवाद के बीच पीएम मोदी का बयान 'देश के कोने-कोने तक 5G कनेक्टिविटी, पहले डिजिटिल डिवाइड चुनौती थी', इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्धाटन कर बोले पीएम मोदी
वारदात कैसे हुई और कैसे खुला राज
'जिनकी अवैध कमाई बंद हो गई, वे मुझे प्यार करेंगे क्या'; SIR विवाद के बीच पीएम मोदी का बयान
'देश के कोने-कोने तक 5G कनेक्टिविटी, पहले डिजिटिल डिवाइड चुनौती थी', इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्धाटन कर बोले पीएम मोदी
डिजिटल क्रांति से सुशासन तक, मोबाइल ने बदली भारत की तस्वीर: पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस को दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी की प्रगति में महत्वपूर्ण बताया
SIR के पक्ष में 42 रिटायर्ड जजों का देश के नाम ओपन लेटर, विपक्ष के प्रदर्शन को बताया लोकतंत्र पर हमला
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- •Hindi ज्ञानेश कुमार विवाद के बीच SIR के सपोर्ट में उतरे 42 पूर्व जज, लिख डाला ओपन लेटर, National Hindi News
- •मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन: एसआईआर और फार्म-6 में बदलाव रोकने, 13.8 करोड़ मतदा...
- •'सुप्रीम कोर्ट का SIR वाला फैसला असंवैधानिक..': पूर्व जज का दावा- लोकतंत्र की हत्या कर रहे CEC ज्ञानेश कुमार
- •SIR पर जस्टिस भुइयां के बयान से पूर्व जज बंटे, गवई ने जताई आपत्ति तो ओका ने किया समर्थन
- •यह शोर वोटर नहीं, चुनाव हारने वाली पार्टियां मचा रही... SIR पर विपक्ष के विरोध के बीच पूर्व जज का बड़ा बयान
- •'चुप हो जाओ माइलॉर्ड्स-रिटायरमेंट के मजे लो', रिटायर्ड जज पर भड़कीं महुआ मोइत्रा
- •Hindi उच्चतम न्यायालय का एसआईआर को सही ठहराने वाला फैसला अलोकतांत्रिक: पूर्व न्यायाधीश गौड़ा
- •पीएम मोदी ने बताया, '50 लाख करोड़ रुपये के डीबीटी से 5 लाख करोड़ रुपये की लीकेज रुकी है।'
- •SIR पर जस्टिस भुइयां के बयान से पूर्व जज बंटे, गवई ने जताई आपत्ति तो ओका ने किया समर्थन
- •जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए। चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस पर देशभर में बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं, तो अब पूर्व जज ने सुप्रीम कोर्ट से इसको लेकर एक अपील कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोपाल गौड़ा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को अपने उस फैसले को वापस ले लेना चाहिए, जिसमें उसने एसआईआर को सही ठहराया था। पूर्व जज ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने गलत फैक्ट्स दिखाकर कोर्ट को गुमराह करके फ्रॉड किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मई महीने में बिहार में SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा था।
- •लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए ताकि यह पता चल सके कि SIR का फैसला आयोग ने ज्यादातर इलेक्शन कमिश्नरों की सहमति और मंजूरी से लिया था या नहीं। जस्टिस गौड़ा ने कहा, "SIR फैसले में गैर-कानूनी और असंवैधानिकता साफ दिख रही है।" वहीं, हाल ही में फॉर्म-6 को लेकर विवाद हुआ, जिसमें बदलाव करने के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी।
- •जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के तौर पर वोटरों के बड़े पैमाने पर वोटिंग से वंचित होने के खिलाफ कमेंट करके जस्टिस उज्जल भुयान ने कोई कानूनी गलती नहीं की। एक जज के तौर पर जस्टिस भुइयां को संवैधानिक मुद्दे पर बोलने का हक था। वहीं, जस्टिस भुइयां के खिलाफ पूर्व सीजेआई बीआर गवई की आलोचना पर बात करते हुए जस्टिस गौड़ा ने कहा कि उन्हें ऐसी आलोचना करने का क्या अधिकार है? उन्होंने कहा, ''जब पूर्व सीजेआई गवई बॉम्बे हाई कोर्ट के जज थे, तब उन्होंने लोया केस पर टिप्पणी की थी, जब उस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने चुनाव आयोग के कमिश्नरों की असहमति वाले मुद्दे पर भी जवाब नहीं दिया।''
- •पूर्व सीजेआई बी. आर. गवई ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के मताधिकार से वंचित किए जाने संबंधी बयान की सोमवार को आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। जस्टिस भुइयां ने रविवार को 'नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' में '19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता' के समापन समारोह में कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
- •उन्होंने यह भी कहा कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग की व्यवस्था नहीं करता है-एक जिन्हें वोट देने का अधिकार हो और दूसरे जिन्हें न हो-और किसी भी तरह का किंतु-परंतु इस तरह की प्रक्रिया को सही नहीं ठहरा सकता। इस मुद्दे पर 'पीटीआई-भाषा' से अपनी पहली प्रतिक्रिया में पूर्व प्रधान न्यायाधीश गवई ने कहा, ''न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है।''
कानूनी कार्रवाई और आरोपियों की वर्तमान स्थिति
Hindi ज्ञानेश कुमार विवाद के बीच SIR के सपोर्ट में उतरे 42 पूर्व जज, लिख डाला ओपन लेटर, National Hindi News
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन: एसआईआर और फार्म-6 में बदलाव रोकने, 13.8 करोड़ मतदा...
'सुप्रीम कोर्ट का SIR वाला फैसला असंवैधानिक..': पूर्व जज का दावा- लोकतंत्र की हत्या कर रहे CEC ज्ञानेश कुमार
SIR पर जस्टिस भुइयां के बयान से पूर्व जज बंटे, गवई ने जताई आपत्ति तो ओका ने किया समर्थन
यह शोर वोटर नहीं, चुनाव हारने वाली पार्टियां मचा रही... SIR पर विपक्ष के विरोध के बीच पूर्व जज का बड़ा बयान
'चुप हो जाओ माइलॉर्ड्स-रिटायरमेंट के मजे लो', रिटायर्ड जज पर भड़कीं महुआ मोइत्रा
Hindi उच्चतम न्यायालय का एसआईआर को सही ठहराने वाला फैसला अलोकतांत्रिक: पूर्व न्यायाधीश गौड़ा
पीएम मोदी ने बताया, '50 लाख करोड़ रुपये के डीबीटी से 5 लाख करोड़ रुपये की लीकेज रुकी है।'
SIR पर जस्टिस भुइयां के बयान से पूर्व जज बंटे, गवई ने जताई आपत्ति तो ओका ने किया समर्थन
जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए। चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस पर देशभर में बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं, तो अब पूर्व जज ने सुप्रीम कोर्ट से इसको लेकर एक अपील कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोपाल गौड़ा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को अपने उस फैसले को वापस ले लेना चाहिए, जिसमें उसने एसआईआर को सही ठहराया था। पूर्व जज ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने गलत फैक्ट्स दिखाकर कोर्ट को गुमराह करके फ्रॉड किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मई महीने में बिहार में SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा था।
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए ताकि यह पता चल सके कि SIR का फैसला आयोग ने ज्यादातर इलेक्शन कमिश्नरों की सहमति और मंजूरी से लिया था या नहीं। जस्टिस गौड़ा ने कहा, "SIR फैसले में गैर-कानूनी और असंवैधानिकता साफ दिख रही है।" वहीं, हाल ही में फॉर्म-6 को लेकर विवाद हुआ, जिसमें बदलाव करने के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी।
जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के तौर पर वोटरों के बड़े पैमाने पर वोटिंग से वंचित होने के खिलाफ कमेंट करके जस्टिस उज्जल भुयान ने कोई कानूनी गलती नहीं की। एक जज के तौर पर जस्टिस भुइयां को संवैधानिक मुद्दे पर बोलने का हक था। वहीं, जस्टिस भुइयां के खिलाफ पूर्व सीजेआई बीआर गवई की आलोचना पर बात करते हुए जस्टिस गौड़ा ने कहा कि उन्हें ऐसी आलोचना करने का क्या अधिकार है? उन्होंने कहा, ''जब पूर्व सीजेआई गवई बॉम्बे हाई कोर्ट के जज थे, तब उन्होंने लोया केस पर टिप्पणी की थी, जब उस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने चुनाव आयोग के कमिश्नरों की असहमति वाले मुद्दे पर भी जवाब नहीं दिया।''
सिलसिलेवार घटनाक्रम और आधिकारिक खुलासे
पूर्व सीजेआई बी. आर. गवई ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के मताधिकार से वंचित किए जाने संबंधी बयान की सोमवार को आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। जस्टिस भुइयां ने रविवार को 'नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' में '19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता' के समापन समारोह में कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग की व्यवस्था नहीं करता है-एक जिन्हें वोट देने का अधिकार हो और दूसरे जिन्हें न हो-और किसी भी तरह का किंतु-परंतु इस तरह की प्रक्रिया को सही नहीं ठहरा सकता। इस मुद्दे पर 'पीटीआई-भाषा' से अपनी पहली प्रतिक्रिया में पूर्व प्रधान न्यायाधीश गवई ने कहा, ''न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है।''
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।
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