लेखक के बारे में रिजवान रिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्‍या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्‍टोरी और वीडियो के जरिए व‍िश्‍लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है। पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं। रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्‍ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। और पढ़ें तेहरान: ईरानी अधिकारी ने अफगान तालिबान की तारीफ की है जबकि पाकिस्तान के रवैये की आलोचना की है। ईरानी संसद के आर्थिक आयोग के चेयरमैन मोहसिन जंगनेह ने ईरान और अमेरिका के बीच टकराव में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश को 'फर्जी' करार दिया है। वहीं जंग के दौरान अफगानिस्तान की ओर से ईरान को मिले समर्थन के लिए तालिबान की तारीफ की है। मोहसिन ने यहां तक कहा है कि पाकिस्तान सरकार में बैठे लोग वही ट्वीट करते हैं, जिसकी इजाजत उनको अमेरिका देता है।मोहसिन जंगनेह ने पाकिस्तान की मध्यस्था की कोशिश का मजाक उडाया है और शहबाज शरीफ पर तंज कसा है। जंगनेह ने कहा कि जब उन्होंने (शरीफ) पहली बार ट्वीट किया तो उसे स्टीव विटकॉफ ने आगे बढ़ाया। उनका ट्वीट भी अमेरिकियों ने ही लिखा था। उनके ट्वीट ड्राफ्ट वहीं से आया था। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ है लेकिन मोहसिन के बयान से लवहता है कि उनका इस्लामाबाद पर विश्वाल नहीं है,ईरान-अफगान रिश्तेईरान और अफगानिस्तान ने हालिया दिनों में रिश्ते सुधारने के संकेत दिए हैं। तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने हाल ही में मॉस्को फॉर्मेट के दौरान ईरानी राजनयिक मोहम्मद रजा बहरामी से मुलाकात की है। दोनों अधिकारियों ने बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।तालिबान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मुत्तकी और ईरानी प्रतिनिधि के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग और आर्थिक जुड़ाव को बढ़ाने के महत्व पर थी। ईरान ने तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है लेकिन हाल के वर्षों में उसने तालिबान से अपने संबंध बढ़ाए हैं। यह लगातार बेहतर हो रहा है।ईरान युद्ध के 8 महीनेअमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से टकराव चल रहा है। इस दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की और दोनों देशों के बीच दो महीने के लिए संघर्ष-विराम (सीजफायर) हुआ। हालांकि उस दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले होते रहे। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है।

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लेखक के बारे में रिजवान रिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्‍या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्‍टोरी और वीडियो के जरिए व‍िश्‍लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है। पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं। रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्‍ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। और पढ़ें

तेहरान: ईरानी अधिकारी ने अफगान तालिबान की तारीफ की है जबकि पाकिस्तान के रवैये की आलोचना की है। ईरानी संसद के आर्थिक आयोग के चेयरमैन मोहसिन जंगनेह ने ईरान और अमेरिका के बीच टकराव में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश को 'फर्जी' करार दिया है। वहीं जंग के दौरान अफगानिस्तान की ओर से ईरान को मिले समर्थन के लिए तालिबान की तारीफ की है। मोहसिन ने यहां तक कहा है कि पाकिस्तान सरकार में बैठे लोग वही ट्वीट करते हैं, जिसकी इजाजत उनको अमेरिका देता है।मोहसिन जंगनेह ने पाकिस्तान की मध्यस्था की कोशिश का मजाक उडाया है और शहबाज शरीफ पर तंज कसा है। जंगनेह ने कहा कि जब उन्होंने (शरीफ) पहली बार ट्वीट किया तो उसे स्टीव विटकॉफ ने आगे बढ़ाया। उनका ट्वीट भी अमेरिकियों ने ही लिखा था। उनके ट्वीट ड्राफ्ट वहीं से आया था। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ है लेकिन मोहसिन के बयान से लवहता है कि उनका इस्लामाबाद पर विश्वाल नहीं है,ईरान-अफगान रिश्तेईरान और अफगानिस्तान ने हालिया दिनों में रिश्ते सुधारने के संकेत दिए हैं। तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने हाल ही में मॉस्को फॉर्मेट के दौरान ईरानी राजनयिक मोहम्मद रजा बहरामी से मुलाकात की है। दोनों अधिकारियों ने बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।तालिबान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मुत्तकी और ईरानी प्रतिनिधि के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग और आर्थिक जुड़ाव को बढ़ाने के महत्व पर थी। ईरान ने तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है लेकिन हाल के वर्षों में उसने तालिबान से अपने संबंध बढ़ाए हैं। यह लगातार बेहतर हो रहा है।ईरान युद्ध के 8 महीनेअमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से टकराव चल रहा है। इस दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की और दोनों देशों के बीच दो महीने के लिए संघर्ष-विराम (सीजफायर) हुआ। हालांकि उस दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले होते रहे। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है।

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  • •लेखक के बारे में रिजवान रिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्‍या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्‍टोरी और वीडियो के जरिए व‍िश्‍लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है। पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं। रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्‍ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। और पढ़ें
  • •तेहरान: ईरानी अधिकारी ने अफगान तालिबान की तारीफ की है जबकि पाकिस्तान के रवैये की आलोचना की है। ईरानी संसद के आर्थिक आयोग के चेयरमैन मोहसिन जंगनेह ने ईरान और अमेरिका के बीच टकराव में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश को 'फर्जी' करार दिया है। वहीं जंग के दौरान अफगानिस्तान की ओर से ईरान को मिले समर्थन के लिए तालिबान की तारीफ की है। मोहसिन ने यहां तक कहा है कि पाकिस्तान सरकार में बैठे लोग वही ट्वीट करते हैं, जिसकी इजाजत उनको अमेरिका देता है।मोहसिन जंगनेह ने पाकिस्तान की मध्यस्था की कोशिश का मजाक उडाया है और शहबाज शरीफ पर तंज कसा है। जंगनेह ने कहा कि जब उन्होंने (शरीफ) पहली बार ट्वीट किया तो उसे स्टीव विटकॉफ ने आगे बढ़ाया। उनका ट्वीट भी अमेरिकियों ने ही लिखा था। उनके ट्वीट ड्राफ्ट वहीं से आया था। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ है लेकिन मोहसिन के बयान से लवहता है कि उनका इस्लामाबाद पर विश्वाल नहीं है,ईरान-अफगान रिश्तेईरान और अफगानिस्तान ने हालिया दिनों में रिश्ते सुधारने के संकेत दिए हैं। तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने हाल ही में मॉस्को फॉर्मेट के दौरान ईरानी राजनयिक मोहम्मद रजा बहरामी से मुलाकात की है। दोनों अधिकारियों ने बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।तालिबान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मुत्तकी और ईरानी प्रतिनिधि के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग और आर्थिक जुड़ाव को बढ़ाने के महत्व पर थी। ईरान ने तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है लेकिन हाल के वर्षों में उसने तालिबान से अपने संबंध बढ़ाए हैं। यह लगातार बेहतर हो रहा है।ईरान युद्ध के 8 महीनेअमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से टकराव चल रहा है। इस दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की और दोनों देशों के बीच दो महीने के लिए संघर्ष-विराम (सीजफायर) हुआ। हालांकि उस दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमले होते रहे। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है।

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