नई दिल्ली. बिना किसी अथक प्रयास के आपको बहुत कुछ मिल जाए तो किस्मत का खेल कहा जाता है और अचानक अप्रत्याशित रूप से आपको ऐसी ताकत मिल जाए जहां आप दूसरों के भविष्य को तय करने लगे तो उसे राजयोग का मिलना कहा जाता है. ऐसे में कोई ऐसा शख्स जो दोनों ताकत पाने की काबिलियत रखता हो और वो किसी ऐसे व्यक्ति को मिल जाए तो उसे क्या कहेंगे. सारे खाने टिक करने के बाद भी फैसला आपके पक्ष में ना हो तो फिर इस किसमत की मार ही कहा जाए तो गलत ना होगा. भारत के पूर्व ओपनर वसीम जाफ़र भारतीय क्रिकेट के उन्हीं किरदारों में से एक हैं. घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया, मगर टीम इंडिया में जगह कभी पक्की नहीं हुई. अब राष्ट्रीय चयन समिति का दरवाज़ा खुला, तो इस बार भी वे बाहर रह गए. उनके रिकॉर्ड ही उनके आड़े आ गए. कम खेले होते, कम रन बनाए होते तो शायद चयन समिति में होते पर शायद यहीं नियति है आप बेस्ट देकर भी पीछे रह जाते है.

मैदान पर क्या हुआ: मुख्य घटनाक्रम और खेल का रुख

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नई दिल्ली. बिना किसी अथक प्रयास के आपको बहुत कुछ मिल जाए तो किस्मत का खेल कहा जाता है और अचानक अप्रत्याशित रूप से आपको ऐसी ताकत मिल जाए जहां आप दूसरों के भविष्य को तय करने लगे तो उसे राजयोग का मिलना कहा जाता है. ऐसे में कोई ऐसा शख्स जो दोनों ताकत पाने की काबिलियत रखता हो और वो किसी ऐसे व्यक्ति को मिल जाए तो उसे क्या कहेंगे. सारे खाने टिक करने के बाद भी फैसला आपके पक्ष में ना हो तो फिर इस किसमत की मार ही कहा जाए तो गलत ना होगा.

भारत के पूर्व ओपनर वसीम जाफ़र भारतीय क्रिकेट के उन्हीं किरदारों में से एक हैं. घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया, मगर टीम इंडिया में जगह कभी पक्की नहीं हुई. अब राष्ट्रीय चयन समिति का दरवाज़ा खुला, तो इस बार भी वे बाहर रह गए. उनके रिकॉर्ड ही उनके आड़े आ गए. कम खेले होते, कम रन बनाए होते तो शायद चयन समिति में होते पर शायद यहीं नियति है आप बेस्ट देकर भी पीछे रह जाते है.

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वसीम जाफर पर रमेश पवार कैसे भारी पड़े इसको समझने के लिए बोर्ड की गणित को समझना पड़ेगा. बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक़ इस समिति में सबसे ज़्यादा टेस्ट खेला सदस्य अध्यक्ष होता है विज्ञप्ति में साफ़ लिखा है कि वरिष्ठता, यानी सबसे ज़्यादा टेस्ट के आधार पर प्रज्ञान ओझा समिति की अध्यक्षता करेंगे. जाफ़र के 31 टेस्ट ओझा के 24 से ज़्यादा थे. वे चुने जाते तो नियम के तहत अपने-आप अध्यक्ष बन जाते. ख़बरों के मुताबिक़ क्रिकेट एडवाइज़री कमेटी (CAC) को लगा कि विश्व कप से एक साल पहले नया अध्यक्ष आया तो समिति की मौजूदा सोच और निरंतरता पर असर पड़ेगा. चुने गए रमेश पोवार, जिनके नाम दो टेस्ट और 31 वनडे हैं. रमेश पोवार का राष्ट्रीय चयनकर्ता बनाना कई लोगों को रास नहीं आएगा. वे पहले भारतीय महिला टीम के साथ काम कर चुके हैं और तब मिताली राज के साथ उनका टकराव हुआ था. उनके कोचिंग कार्यकाल का वह वाक़ई विवादित अध्याय था, और उस फ़ज़ीहत के बाद उन्हें हटाया गय। तो इस नियुक्ति पर कुछ सवालिया निशान तो रहेंगे.

खिलाड़ियों का प्रदर्शन और मैच के अहम आंकड़े

  • •नई दिल्ली. बिना किसी अथक प्रयास के आपको बहुत कुछ मिल जाए तो किस्मत का खेल कहा जाता है और अचानक अप्रत्याशित रूप से आपको ऐसी ताकत मिल जाए जहां आप दूसरों के भविष्य को तय करने लगे तो उसे राजयोग का मिलना कहा जाता है. ऐसे में कोई ऐसा शख्स जो दोनों ताकत पाने की काबिलियत रखता हो और वो किसी ऐसे व्यक्ति को मिल जाए तो उसे क्या कहेंगे. सारे खाने टिक करने के बाद भी फैसला आपके पक्ष में ना हो तो फिर इस किसमत की मार ही कहा जाए तो गलत ना होगा.
  • •भारत के पूर्व ओपनर वसीम जाफ़र भारतीय क्रिकेट के उन्हीं किरदारों में से एक हैं. घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया, मगर टीम इंडिया में जगह कभी पक्की नहीं हुई. अब राष्ट्रीय चयन समिति का दरवाज़ा खुला, तो इस बार भी वे बाहर रह गए. उनके रिकॉर्ड ही उनके आड़े आ गए. कम खेले होते, कम रन बनाए होते तो शायद चयन समिति में होते पर शायद यहीं नियति है आप बेस्ट देकर भी पीछे रह जाते है.
  • •वसीम जाफर पर रमेश पवार कैसे भारी पड़े इसको समझने के लिए बोर्ड की गणित को समझना पड़ेगा. बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक़ इस समिति में सबसे ज़्यादा टेस्ट खेला सदस्य अध्यक्ष होता है विज्ञप्ति में साफ़ लिखा है कि वरिष्ठता, यानी सबसे ज़्यादा टेस्ट के आधार पर प्रज्ञान ओझा समिति की अध्यक्षता करेंगे. जाफ़र के 31 टेस्ट ओझा के 24 से ज़्यादा थे. वे चुने जाते तो नियम के तहत अपने-आप अध्यक्ष बन जाते. ख़बरों के मुताबिक़ क्रिकेट एडवाइज़री कमेटी (CAC) को लगा कि विश्व कप से एक साल पहले नया अध्यक्ष आया तो समिति की मौजूदा सोच और निरंतरता पर असर पड़ेगा. चुने गए रमेश पोवार, जिनके नाम दो टेस्ट और 31 वनडे हैं. रमेश पोवार का राष्ट्रीय चयनकर्ता बनाना कई लोगों को रास नहीं आएगा. वे पहले भारतीय महिला टीम के साथ काम कर चुके हैं और तब मिताली राज के साथ उनका टकराव हुआ था. उनके कोचिंग कार्यकाल का वह वाक़ई विवादित अध्याय था, और उस फ़ज़ीहत के बाद उन्हें हटाया गय। तो इस नियुक्ति पर कुछ सवालिया निशान तो रहेंगे.

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।