चंडीगढ़। पीजीआई की एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक और नकल के मामले में तीन और महिला आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अदालत ने पी. मंजुला, जी. कृष्णावेनी और जी. पदमा को दोषी ठहराते हुए उनके जेल में बिताए तीन से चार महीने के समय को ही सजा मान लिया। इससे पहले आंध्र प्रदेश की वाई. हरिप्रिया भी जुर्म कबूल कर चुकी है। इस तरह 32 आरोपियों वाले मामले में अब तक चार दोषी करार दिए जा चुके हैं। सीबीआई ने वर्ष 2012 में इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। मामला 10 नवंबर 2012 को पीजीआई में होने वाली एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा चंडीगढ़ के 11 केंद्रों पर आयोजित होनी थी। जांच में सामने आया कि साजिश के तहत 14 डमी लड़कियों से अलग-अलग नाम और फोटो लगाकर दो-दो आवेदन फार्म भरवाए गए थे। ये महिलाएं मेडिकल छात्राएं नहीं थीं और परीक्षा के लिए पात्र भी नहीं थीं। प्रत्येक को इस काम के बदले दो लाख रुपये तक देने का लालच दिया गया था।
घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला
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चंडीगढ़। पीजीआई की एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक और नकल के मामले में तीन और महिला आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अदालत ने पी. मंजुला, जी. कृष्णावेनी और जी. पदमा को दोषी ठहराते हुए उनके जेल में बिताए तीन से चार महीने के समय को ही सजा मान लिया। इससे पहले आंध्र प्रदेश की वाई. हरिप्रिया भी जुर्म कबूल कर चुकी है। इस तरह 32 आरोपियों वाले मामले में अब तक चार दोषी करार दिए जा चुके हैं।
सीबीआई ने वर्ष 2012 में इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। मामला 10 नवंबर 2012 को पीजीआई में होने वाली एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा चंडीगढ़ के 11 केंद्रों पर आयोजित होनी थी। जांच में सामने आया कि साजिश के तहत 14 डमी लड़कियों से अलग-अलग नाम और फोटो लगाकर दो-दो आवेदन फार्म भरवाए गए थे। ये महिलाएं मेडिकल छात्राएं नहीं थीं और परीक्षा के लिए पात्र भी नहीं थीं। प्रत्येक को इस काम के बदले दो लाख रुपये तक देने का लालच दिया गया था।
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मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु
- •चंडीगढ़। पीजीआई की एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक और नकल के मामले में तीन और महिला आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अदालत ने पी. मंजुला, जी. कृष्णावेनी और जी. पदमा को दोषी ठहराते हुए उनके जेल में बिताए तीन से चार महीने के समय को ही सजा मान लिया। इससे पहले आंध्र प्रदेश की वाई. हरिप्रिया भी जुर्म कबूल कर चुकी है। इस तरह 32 आरोपियों वाले मामले में अब तक चार दोषी करार दिए जा चुके हैं।
- •सीबीआई ने वर्ष 2012 में इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। मामला 10 नवंबर 2012 को पीजीआई में होने वाली एमडी/एमएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा चंडीगढ़ के 11 केंद्रों पर आयोजित होनी थी। जांच में सामने आया कि साजिश के तहत 14 डमी लड़कियों से अलग-अलग नाम और फोटो लगाकर दो-दो आवेदन फार्म भरवाए गए थे। ये महिलाएं मेडिकल छात्राएं नहीं थीं और परीक्षा के लिए पात्र भी नहीं थीं। प्रत्येक को इस काम के बदले दो लाख रुपये तक देने का लालच दिया गया था।
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
इस घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर समीक्षा जारी है। ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर विवरण को अद्यतन किया जाएगा।






