ग्रहों को हमेशा से गोल आकार का माना जाता रहा है. जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो खगोलविद उसे एक गोल डिस्क की तरह नापते हैं. लेकिन नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के नए आंकड़ों ने इस पुरानी धारणा को तोड़ दिया है. वास्प-17बी (WASP-17b) नाम के एक विशालकाय एक्सोप्लैनेट (सौरमंडल के बाहर का ग्रह) पर की गई नई रिसर्च दिखाती है कि उसका वायुमंडल बिल्कुल गोल नहीं है. इस ग्रह का एक हिस्सा दूसरे हिस्से के मुकाबले अंतरिक्ष में कहीं ज्यादा दूर तक उभरा हुआ है. वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रह के जिस हिस्से पर दिन ढल रहा होता है यानी शाम हो रही होती है, वहां का वायुमंडल सुबह वाले हिस्से के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा दूरी तक फैल जाता है. इतना ही नहीं, उस हिस्से का तापमान भी सुबह वाले हिस्से से 1,200°F (660°C) ज्यादा गर्म रहता है. जेम्स वेब टेलीस्कोप के जरिए कैसे हुई इस अजीबोगरीब ग्रह की खोज?

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

ग्रहों को हमेशा से गोल आकार का माना जाता रहा है. जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो खगोलविद उसे एक गोल डिस्क की तरह नापते हैं. लेकिन नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के नए आंकड़ों ने इस पुरानी धारणा को तोड़ दिया है. वास्प-17बी (WASP-17b) नाम के एक विशालकाय एक्सोप्लैनेट (सौरमंडल के बाहर का ग्रह) पर की गई नई रिसर्च दिखाती है कि उसका वायुमंडल बिल्कुल गोल नहीं है. इस ग्रह का एक हिस्सा दूसरे हिस्से के मुकाबले अंतरिक्ष में कहीं ज्यादा दूर तक उभरा हुआ है. वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रह के जिस हिस्से पर दिन ढल रहा होता है यानी शाम हो रही होती है, वहां का वायुमंडल सुबह वाले हिस्से के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा दूरी तक फैल जाता है. इतना ही नहीं, उस हिस्से का तापमान भी सुबह वाले हिस्से से 1,200°F (660°C) ज्यादा गर्म रहता है.

जेम्स वेब टेलीस्कोप के जरिए कैसे हुई इस अजीबोगरीब ग्रह की खोज?

कारनेल यूनिवर्सिटी के खगोल विज्ञान विभाग की पोस्टडॉक्टोरल फेलो लिली एल्डर्सन के नेतृत्व में यह रिसर्च पूरी की गई है. इस प्रोजेक्ट में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की हन्ना वेकफोर्ड और डेविड ग्रांट भी शामिल थे. इस टीम ने ही जेम्स वेब टेलीस्कोप के डेटा का इस्तेमाल करके ग्रह को नापने का यह नया तरीका ईजाद किया है.

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •ग्रहों को हमेशा से गोल आकार का माना जाता रहा है. जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो खगोलविद उसे एक गोल डिस्क की तरह नापते हैं. लेकिन नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के नए आंकड़ों ने इस पुरानी धारणा को तोड़ दिया है. वास्प-17बी (WASP-17b) नाम के एक विशालकाय एक्सोप्लैनेट (सौरमंडल के बाहर का ग्रह) पर की गई नई रिसर्च दिखाती है कि उसका वायुमंडल बिल्कुल गोल नहीं है. इस ग्रह का एक हिस्सा दूसरे हिस्से के मुकाबले अंतरिक्ष में कहीं ज्यादा दूर तक उभरा हुआ है. वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रह के जिस हिस्से पर दिन ढल रहा होता है यानी शाम हो रही होती है, वहां का वायुमंडल सुबह वाले हिस्से के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा दूरी तक फैल जाता है. इतना ही नहीं, उस हिस्से का तापमान भी सुबह वाले हिस्से से 1,200°F (660°C) ज्यादा गर्म रहता है.
  • •जेम्स वेब टेलीस्कोप के जरिए कैसे हुई इस अजीबोगरीब ग्रह की खोज?
  • •कारनेल यूनिवर्सिटी के खगोल विज्ञान विभाग की पोस्टडॉक्टोरल फेलो लिली एल्डर्सन के नेतृत्व में यह रिसर्च पूरी की गई है. इस प्रोजेक्ट में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की हन्ना वेकफोर्ड और डेविड ग्रांट भी शामिल थे. इस टीम ने ही जेम्स वेब टेलीस्कोप के डेटा का इस्तेमाल करके ग्रह को नापने का यह नया तरीका ईजाद किया है.
  • •यह पहली बार है जब किसी एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल को पूर्व से पश्चिम तक और भूमध्य रेखा से लेकर ध्रुवों तक एक साथ नापा गया है.

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। किसी भी नए आधिकारिक अपडेट की पुष्टि होते ही जानकारी साझा की जाएगी।