खगोलविदों ने 2 ऐसे सफेद बौने तारों की पहचान की है, जिनके रंग बहुत ही अनोखे हें। इनमें से एक हरा चमकता है और दूसरा संभवतः अब तक का सबसे लाल तारा है, जिसे देखा गया है। ये दोनों तारे पृथ्वी से 65-प्रकाश वर्ष के दायरे में हें। इनमें से WD J1011+2845 तारा तो पृथ्वी से केवल 48-प्रकाश वर्ष दूर है। हरा तारा, जिसका नाम WD J1330+6435 है, इसे अपना रंग वायुमंडल में मौजूद ढेर सारे कैल्शियम, लिथियम और सोडियम की वजह से मिलता है। इसमें सोडियम स्पेक्ट्रम के नारंगी हिस्से को सोख लेता है।
घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला
खगोलविदों ने 2 ऐसे सफेद बौने तारों की पहचान की है, जिनके रंग बहुत ही अनोखे हें। इनमें से एक हरा चमकता है और दूसरा संभवतः अब तक का सबसे लाल तारा है, जिसे देखा गया है।
ये दोनों तारे पृथ्वी से 65-प्रकाश वर्ष के दायरे में हें। इनमें से WD J1011+2845 तारा तो पृथ्वी से केवल 48-प्रकाश वर्ष दूर है। हरा तारा, जिसका नाम WD J1330+6435 है, इसे अपना रंग वायुमंडल में मौजूद ढेर सारे कैल्शियम, लिथियम और सोडियम की वजह से मिलता है। इसमें सोडियम स्पेक्ट्रम के नारंगी हिस्से को सोख लेता है।
दूसरा WD J1011+2845 तारा गहरे सैल्मन-गुलाबी (हल्का गुलाबी और नारंगी का मिश्रण) रंग का दिखता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके गहरे संवहन क्षेत्र ने इसके कोर से कार्बन को इसकी सतह तक ऊपर उठा दिया है। कार्बन के अणु प्रकाश को इतना अधिक विकृत करते हैं कि इसका लगभग सारा प्रकाश 600 नैनोमीटर से अधिक की तरंग दैर्ध्य में सिमट जाता है।
मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु
- •खगोलविदों ने 2 ऐसे सफेद बौने तारों की पहचान की है, जिनके रंग बहुत ही अनोखे हें। इनमें से एक हरा चमकता है और दूसरा संभवतः अब तक का सबसे लाल तारा है, जिसे देखा गया है।
- •ये दोनों तारे पृथ्वी से 65-प्रकाश वर्ष के दायरे में हें। इनमें से WD J1011+2845 तारा तो पृथ्वी से केवल 48-प्रकाश वर्ष दूर है। हरा तारा, जिसका नाम WD J1330+6435 है, इसे अपना रंग वायुमंडल में मौजूद ढेर सारे कैल्शियम, लिथियम और सोडियम की वजह से मिलता है। इसमें सोडियम स्पेक्ट्रम के नारंगी हिस्से को सोख लेता है।
- •दूसरा WD J1011+2845 तारा गहरे सैल्मन-गुलाबी (हल्का गुलाबी और नारंगी का मिश्रण) रंग का दिखता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके गहरे संवहन क्षेत्र ने इसके कोर से कार्बन को इसकी सतह तक ऊपर उठा दिया है। कार्बन के अणु प्रकाश को इतना अधिक विकृत करते हैं कि इसका लगभग सारा प्रकाश 600 नैनोमीटर से अधिक की तरंग दैर्ध्य में सिमट जाता है।
- •वारविक यूनिवर्सिटी के खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी समूह में वारविक प्राइज फेलो डॉ मार्क हॉलैंड्स ने इस शोध का नेतृत्व किया। इसमें सामने आया कि पृथ्वी के पास मौजूद करीब 30 में से एक सफेद बौने तारे का रंग ऐसा ही असामान्य होता है।
ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। किसी भी नए आधिकारिक अपडेट की पुष्टि होते ही जानकारी साझा की जाएगी।





