MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है। MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है।

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है।

MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है।

मुकेश कुमार, समस्तीपुर। Earth Observation Technology : समस्तीपुर जिले के युवा इंजीनियर की तकनीकी प्रतिभा अब अंतरिक्ष में भारत की तस्वीरें खींचने की तैयारी में है। जिला मुख्यालय स्थित रेलवे कालोनी में पले-बढ़े संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओएन स्पेस लैब्स ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

कंपनी की तीन विज्ञानियों की टीम ने महज 502 ग्राम वजन वाले अत्याधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा मीरा को अंतरिक्ष तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है।

यह कैमरा अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग अंतरिक्ष बल अड्डे से एक अक्टूबर को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 राकेट के ट्रांसपोर्टर-18 अभियान के जरिये पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंच चुका है।

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है।
  • •MEERA Multispectral Camera : समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की ईओएन स्पेस लैब्स ने 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा 'मीरा' अंतरिक्ष में भेजा है।
  • •मुकेश कुमार, समस्तीपुर। Earth Observation Technology : समस्तीपुर जिले के युवा इंजीनियर की तकनीकी प्रतिभा अब अंतरिक्ष में भारत की तस्वीरें खींचने की तैयारी में है। जिला मुख्यालय स्थित रेलवे कालोनी में पले-बढ़े संजय कुमार के नेतृत्व वाली हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओएन स्पेस लैब्स ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
  • •कंपनी की तीन विज्ञानियों की टीम ने महज 502 ग्राम वजन वाले अत्याधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा मीरा को अंतरिक्ष तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है।
  • •यह कैमरा अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग अंतरिक्ष बल अड्डे से एक अक्टूबर को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 राकेट के ट्रांसपोर्टर-18 अभियान के जरिये पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंच चुका है।
  • •इसे टेकमी2स्पेस के एमओआइ-1ए कक्षीय कंप्यूटिंग उपग्रह के साथ जोड़ा गया है। 10 अक्टूबर से कैमरा काम करना शुरू करेगा और अंतरिक्ष से धरती की तस्वीरों के साथ विभिन्न प्रकार का आंकड़ा जुटाएगा।
  • •मीरा की सबसे बड़ी विशेषता उसका बेहद कम वजन और छोटा आकार है। महज 502 ग्राम वजन वाला यह सूक्ष्म अंतरिक्ष चित्रण उपकरण नौ अलग-अलग बहुवर्णीय पट्टियों में धरती से संबंधित आंकड़े जुटाने में सक्षम है। इसका धरातलीय विभेदन करीब 9.2 मीटर है। कम वजन में अधिक क्षमता वाला कैमरा तैयार करना आसान नहीं था।
  • •अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरण को प्रक्षेपण के दौरान तेज कंपन और अंतरिक्ष में तापमान के बड़े बदलावों के बीच काम करने लायक बनाना पड़ता है। संजय और उनकी टीम ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए हल्का और अत्याधुनिक प्रकाशीय तंत्र विकसित किया।
  • •इस उपलब्धि के पीछे तीन भारतीय इंजीनियरों की टीम है। समस्तीपुर के संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर वर्ष 2022 में हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की नींव रखी थी।
  • •संजय कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। संजय प्रकाशीय तंत्र के डिजाइन और विकास से जुड़े हैं। पुनीत सूक्ष्म और सटीक निर्माण तकनीक पर काम करते हैं, जबकि मनोज प्रकाशीय अंतरिक्ष उपकरणों के तंत्र और साझेदारियों से जुड़े हैं।

आधिकारिक कार्रवाई और आगे की स्थिति

इसे टेकमी2स्पेस के एमओआइ-1ए कक्षीय कंप्यूटिंग उपग्रह के साथ जोड़ा गया है। 10 अक्टूबर से कैमरा काम करना शुरू करेगा और अंतरिक्ष से धरती की तस्वीरों के साथ विभिन्न प्रकार का आंकड़ा जुटाएगा।

मीरा की सबसे बड़ी विशेषता उसका बेहद कम वजन और छोटा आकार है। महज 502 ग्राम वजन वाला यह सूक्ष्म अंतरिक्ष चित्रण उपकरण नौ अलग-अलग बहुवर्णीय पट्टियों में धरती से संबंधित आंकड़े जुटाने में सक्षम है। इसका धरातलीय विभेदन करीब 9.2 मीटर है। कम वजन में अधिक क्षमता वाला कैमरा तैयार करना आसान नहीं था।

अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरण को प्रक्षेपण के दौरान तेज कंपन और अंतरिक्ष में तापमान के बड़े बदलावों के बीच काम करने लायक बनाना पड़ता है। संजय और उनकी टीम ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए हल्का और अत्याधुनिक प्रकाशीय तंत्र विकसित किया।

इस उपलब्धि के पीछे तीन भारतीय इंजीनियरों की टीम है। समस्तीपुर के संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर वर्ष 2022 में हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की नींव रखी थी।

संजय कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। संजय प्रकाशीय तंत्र के डिजाइन और विकास से जुड़े हैं। पुनीत सूक्ष्म और सटीक निर्माण तकनीक पर काम करते हैं, जबकि मनोज प्रकाशीय अंतरिक्ष उपकरणों के तंत्र और साझेदारियों से जुड़े हैं।

संजय ने तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान से एवियोनिक्स में बीटेक किया। इसके बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास से प्रकाशिकी एवं प्रकाश तकनीक में परास्नातक की पढ़ाई की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद संजय ने उन्नत प्रकाशिकी और चित्रण तकनीक के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान और अमेरिका के रोचेस्टर चिकित्सा केंद्र से जुड़े संस्थान में आठ वर्ष से अधिक समय तक अनुकूली प्रकाशिकी पर काम किया।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। किसी भी नए आधिकारिक अपडेट की पुष्टि होते ही जानकारी साझा की जाएगी।