सुपौल में अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अप्रशिक्षित शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है।

वारदात कैसे हुई और कैसे खुला राज

सुपौल में अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू की है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अप्रशिक्षित शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है।

31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षितों की सेवा समाप्त होगी।

सूचना छिपाने पर संबंधितों के खिलाफ होगी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई।

संवाददाता, सुपौल। नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे तो अब बचना मुश्किल होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जिला शिक्षा विभाग अब अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कुंडली खंगालने में जुट गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर ऐसे शिक्षकों की सूची तलब की है।

खास बात यह है कि 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे शिक्षक यदि बाद में प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं, तब भी उनका नाम सूची से बाहर नहीं होगा। वहीं, निर्धारित तारीख के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।

जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शाखा ने जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के न्यायादेश और निदेशक, प्राथमिक शिक्षा के एक अक्टूबर के निर्देश के आलोक में की जा रही है।

विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना संकलन से लेकर उसकी जांच और जिला कार्यालय को रिपोर्ट सौंपने तक की समय-सीमा तय कर दी है।

पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने

  • •सुपौल में अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू की है।
  • •सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अप्रशिक्षित शिक्षकों की कुंडली खंगाली जा रही है।
  • •31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षितों की सेवा समाप्त होगी।
  • •सूचना छिपाने पर संबंधितों के खिलाफ होगी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई।
  • •संवाददाता, सुपौल। नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे तो अब बचना मुश्किल होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जिला शिक्षा विभाग अब अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कुंडली खंगालने में जुट गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर ऐसे शिक्षकों की सूची तलब की है।
  • •खास बात यह है कि 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे शिक्षक यदि बाद में प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं, तब भी उनका नाम सूची से बाहर नहीं होगा। वहीं, निर्धारित तारीख के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
  • •जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शाखा ने जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के न्यायादेश और निदेशक, प्राथमिक शिक्षा के एक अक्टूबर के निर्देश के आलोक में की जा रही है।
  • •विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना संकलन से लेकर उसकी जांच और जिला कार्यालय को रिपोर्ट सौंपने तक की समय-सीमा तय कर दी है।
  • •विभागीय आदेश के मुताबिक, 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त किए गए अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति अवैध मानते हुए उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जानी है।
  • •इसमें सबसे अहम पहलू यह है कि नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे शिक्षक बाद में प्रशिक्षित हो गए हों, तब भी उन्हें अपना ब्योरा देना होगा।
  • •वर्तमान में स्थानीय निकाय शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक या नियमित शिक्षक के रूप में कार्यरत ऐसे सभी शिक्षकों का नाम तीसरे प्रपत्र में शामिल किया जाएगा। यानी बाद में प्रशिक्षण हासिल कर लेने भर से सूची से नाम हटाने की छूट नहीं होगी।
  • •मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर डीएलएड की योग्यता हासिल करनी होगी। विभागीय पत्र में इसके लिए 31 अगस्त 2028 तक की अवधि का उल्लेख है।
  • •साथ ही, समय-सीमा के बाद अतिरिक्त समय देने के लिए किसी याचिका या प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है। ऐसे शिक्षकों के लिए निर्धारित अवधि में प्रशिक्षण की अर्हता पूरी करना जरूरी होगा।
  • •इस कार्रवाई में केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षक ही नहीं, बल्कि पहले बर्खास्त किए गए शिक्षकों का मामला भी शामिल है। पटना उच्च न्यायालय में एलपीए संख्या 748/2022 में 20 मार्च 2024 को पारित आदेश के आलोक में सेवा से बर्खास्त किए गए, विद्यालय में उपस्थिति से रोके गए अथवा वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे शिक्षकों की अलग सूची तैयार करनी होगी।
  • •विभागीय निर्देश में ऐसे शिक्षकों को फिर से सेवा में बहाल करने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए तीन अलग-अलग प्रपत्र निर्धारित किए हैं।
  • •पहले प्रपत्र में 31 मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त और अब भी अप्रशिक्षित रहते हुए विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों का ब्योरा देना होगा। दूसरे प्रपत्र में बर्खास्त, उपस्थिति से रोके गए या वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी।
  • •तीसरे प्रपत्र में 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे सभी शिक्षकों की जानकारी देनी होगी, चाहे वे अब प्रशिक्षित ही क्यों न हो चुके हों।
  • •डीईओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी विद्यालय या प्रखंड कार्यालय से सूचना छिपाने अथवा अधूरी रिपोर्ट देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित शिक्षक, विद्यालय प्रधान या प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
  • •सभी विद्यालय प्रधानों को प्रपत्रों की एक प्रति स्थापना शाखा और दूसरी संबंधित प्रखंड शिक्षा कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तीनों प्रपत्रों की जांच कर समेकित रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपेंगे।
  • •विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन प्रखंडों में इस श्रेणी का कोई शिक्षक नहीं है, वहां भी तीनों प्रपत्रों में शून्य प्रतिवेदन देना अनिवार्य होगा। यानी किसी प्रखंड को रिपोर्ट देने से छूट नहीं मिलेगी।
  • •अब विभाग की जांच में यह स्पष्ट होगा कि जिले में कितने शिक्षक नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे, कितने अब भी प्रशिक्षण से वंचित हैं और कितने शिक्षक पूर्व में पारित न्यायिक आदेशों से प्रभावित हैं।
  • •यह भी पढ़ें- BPSC TRE-4 में खुशखबरी! फिर बढ़ीं रिक्तियां, अब 33396 पदों पर होगी बंपर बहाली

कानूनी कार्रवाई और आरोपियों की वर्तमान स्थिति

विभागीय आदेश के मुताबिक, 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त किए गए अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति अवैध मानते हुए उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जानी है।

इसमें सबसे अहम पहलू यह है कि नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे शिक्षक बाद में प्रशिक्षित हो गए हों, तब भी उन्हें अपना ब्योरा देना होगा।

वर्तमान में स्थानीय निकाय शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक या नियमित शिक्षक के रूप में कार्यरत ऐसे सभी शिक्षकों का नाम तीसरे प्रपत्र में शामिल किया जाएगा। यानी बाद में प्रशिक्षण हासिल कर लेने भर से सूची से नाम हटाने की छूट नहीं होगी।

मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर डीएलएड की योग्यता हासिल करनी होगी। विभागीय पत्र में इसके लिए 31 अगस्त 2028 तक की अवधि का उल्लेख है।

साथ ही, समय-सीमा के बाद अतिरिक्त समय देने के लिए किसी याचिका या प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है। ऐसे शिक्षकों के लिए निर्धारित अवधि में प्रशिक्षण की अर्हता पूरी करना जरूरी होगा।

इस कार्रवाई में केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षक ही नहीं, बल्कि पहले बर्खास्त किए गए शिक्षकों का मामला भी शामिल है। पटना उच्च न्यायालय में एलपीए संख्या 748/2022 में 20 मार्च 2024 को पारित आदेश के आलोक में सेवा से बर्खास्त किए गए, विद्यालय में उपस्थिति से रोके गए अथवा वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे शिक्षकों की अलग सूची तैयार करनी होगी।

विभागीय निर्देश में ऐसे शिक्षकों को फिर से सेवा में बहाल करने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए तीन अलग-अलग प्रपत्र निर्धारित किए हैं।

पहले प्रपत्र में 31 मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त और अब भी अप्रशिक्षित रहते हुए विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों का ब्योरा देना होगा। दूसरे प्रपत्र में बर्खास्त, उपस्थिति से रोके गए या वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी।

तीसरे प्रपत्र में 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित रहे सभी शिक्षकों की जानकारी देनी होगी, चाहे वे अब प्रशिक्षित ही क्यों न हो चुके हों।

डीईओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी विद्यालय या प्रखंड कार्यालय से सूचना छिपाने अथवा अधूरी रिपोर्ट देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित शिक्षक, विद्यालय प्रधान या प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सभी विद्यालय प्रधानों को प्रपत्रों की एक प्रति स्थापना शाखा और दूसरी संबंधित प्रखंड शिक्षा कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तीनों प्रपत्रों की जांच कर समेकित रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपेंगे।

विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन प्रखंडों में इस श्रेणी का कोई शिक्षक नहीं है, वहां भी तीनों प्रपत्रों में शून्य प्रतिवेदन देना अनिवार्य होगा। यानी किसी प्रखंड को रिपोर्ट देने से छूट नहीं मिलेगी।

सिलसिलेवार घटनाक्रम और आधिकारिक खुलासे

अब विभाग की जांच में यह स्पष्ट होगा कि जिले में कितने शिक्षक नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे, कितने अब भी प्रशिक्षण से वंचित हैं और कितने शिक्षक पूर्व में पारित न्यायिक आदेशों से प्रभावित हैं।

यह भी पढ़ें- BPSC TRE-4 में खुशखबरी! फिर बढ़ीं रिक्तियां, अब 33396 पदों पर होगी बंपर बहाली

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।