मंकीपॉक्स के नए रूप को लेकर दुनिया में चिंता के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अहम अध्ययन किया है। इसमें सामने आया कि वायरस के दो रूप क्लेड-आईबी और क्लेड-आईआईबी बीमारी के लक्षण और शरीर में वायरस के फैलने के मामले में लगभग एक जैसे रहे। वैज्ञानिकों ने खरगोश पर इसका अध्ययन किया। दोनों रूपों से संक्रमित खरगोशों की त्वचा पर दाने निकले, जो बाद में पपड़ी में बदले। जांच में नाक, त्वचा और अंडकोष के ऊतकों में भी वायरस की मौजूदगी मिली। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में न्यूजीलैंड व्हाइट नस्ल के खरगोशों का इस्तेमाल किया। इनमें वायरस के दोनों रूपों से संक्रमण के बाद त्वचा पर लाल, उभरे हुए दाने दिखाई देने लगे। कुछ दाने आगे चलकर गहरे लाल हुए और उन पर पपड़ी जम गई। करीब दो सप्ताह में कई घाव भरने की प्रक्रिया में आ गए। दोनों तरह के वायरस से संक्रमित खरगोशों में बीमारी के लक्षणों और उनकी गंभीरता में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

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मंकीपॉक्स के नए रूप को लेकर दुनिया में चिंता के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अहम अध्ययन किया है। इसमें सामने आया कि वायरस के दो रूप क्लेड-आईबी और क्लेड-आईआईबी बीमारी के लक्षण और शरीर में वायरस के फैलने के मामले में लगभग एक जैसे रहे। वैज्ञानिकों ने खरगोश पर इसका अध्ययन किया। दोनों रूपों से संक्रमित खरगोशों की त्वचा पर दाने निकले, जो बाद में पपड़ी में बदले। जांच में नाक, त्वचा और अंडकोष के ऊतकों में भी वायरस की मौजूदगी मिली।

वैज्ञानिकों ने अध्ययन में न्यूजीलैंड व्हाइट नस्ल के खरगोशों का इस्तेमाल किया। इनमें वायरस के दोनों रूपों से संक्रमण के बाद त्वचा पर लाल, उभरे हुए दाने दिखाई देने लगे। कुछ दाने आगे चलकर गहरे लाल हुए और उन पर पपड़ी जम गई। करीब दो सप्ताह में कई घाव भरने की प्रक्रिया में आ गए। दोनों तरह के वायरस से संक्रमित खरगोशों में बीमारी के लक्षणों और उनकी गंभीरता में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।

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अध्ययन में दोनों समूहों में एक-एक खरगोश के नमूने में वायरस की आनुवंशिक सामग्री मिली, लेकिन बीमारी के साफ लक्षण दिखाई नहीं दिए। यह बताता है कि जानवरों में बाहरी लक्षण न दिखने पर जांच में वायरस के संकेत मिल सकते हैं।

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •मंकीपॉक्स के नए रूप को लेकर दुनिया में चिंता के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अहम अध्ययन किया है। इसमें सामने आया कि वायरस के दो रूप क्लेड-आईबी और क्लेड-आईआईबी बीमारी के लक्षण और शरीर में वायरस के फैलने के मामले में लगभग एक जैसे रहे। वैज्ञानिकों ने खरगोश पर इसका अध्ययन किया। दोनों रूपों से संक्रमित खरगोशों की त्वचा पर दाने निकले, जो बाद में पपड़ी में बदले। जांच में नाक, त्वचा और अंडकोष के ऊतकों में भी वायरस की मौजूदगी मिली।
  • •वैज्ञानिकों ने अध्ययन में न्यूजीलैंड व्हाइट नस्ल के खरगोशों का इस्तेमाल किया। इनमें वायरस के दोनों रूपों से संक्रमण के बाद त्वचा पर लाल, उभरे हुए दाने दिखाई देने लगे। कुछ दाने आगे चलकर गहरे लाल हुए और उन पर पपड़ी जम गई। करीब दो सप्ताह में कई घाव भरने की प्रक्रिया में आ गए। दोनों तरह के वायरस से संक्रमित खरगोशों में बीमारी के लक्षणों और उनकी गंभीरता में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।
  • •अध्ययन में दोनों समूहों में एक-एक खरगोश के नमूने में वायरस की आनुवंशिक सामग्री मिली, लेकिन बीमारी के साफ लक्षण दिखाई नहीं दिए। यह बताता है कि जानवरों में बाहरी लक्षण न दिखने पर जांच में वायरस के संकेत मिल सकते हैं।

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

इस घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर समीक्षा जारी है। ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर विवरण को अद्यतन किया जाएगा।