यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। आज वह 30-40 हजार रुपये की पूंजी से शुरू किए अपने उद्यम से नौ महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। और पढ़ें

घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला

यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। आज वह 30-40 हजार रुपये की पूंजी से शुरू किए अपने उद्यम से नौ महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।

यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। और पढ़ें

30-40 हजार रुपये से शुरु किया चित्तम आर्गेनिक्स, नौ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा

मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु

  • •यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। आज वह 30-40 हजार रुपये की पूंजी से शुरू किए अपने उद्यम से नौ महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
  • •यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। और पढ़ें
  • •30-40 हजार रुपये से शुरु किया चित्तम आर्गेनिक्स, नौ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा
  • •चार साल से उत्पाद बनाने का अनुभव, क्लिनिकल साइकोलाजी में कर चुकीं एमए

ताजा स्थिति व आगे का अपडेट

इस विकास का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्र और हितधारकों पर देखा जा रहा है। घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।