वेंकट कृष्णा बी। रणजी ट्रॉफी के नए सीजन में अरुणाचल प्रदेश की टीम के खेलने पर संकट मंडरा रहा है। राज्य क्रिकेट संघ के दो गुटों के बीच विवाद और हाई कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण टीम के लिए घरेलू क्रिकेट में उतरना मुश्किल हो गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भी अदालती फैसले का इंतजार कर रहा है। अगर अरुणाचल प्रदेश की टीम 11 अक्टूबर से शुरू हो रही रणजी ट्रॉफी में नगालैंड के खिलाफ अपना शुरुआती मुकाबला नहीं खेल पाती है तो उसे मैच गंवाने के साथ पूरे सीजन से निलंबन का भी खतरा हो सकता है। इस विवाद का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ सकता है। उनकी घरेलू सीजन की तैयारी और कमाई दोनों पर पानी फिर सकता है।
वारदात कैसे हुई और कैसे खुला राज
वेंकट कृष्णा बी। रणजी ट्रॉफी के नए सीजन में अरुणाचल प्रदेश की टीम के खेलने पर संकट मंडरा रहा है। राज्य क्रिकेट संघ के दो गुटों के बीच विवाद और हाई कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण टीम के लिए घरेलू क्रिकेट में उतरना मुश्किल हो गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भी अदालती फैसले का इंतजार कर रहा है।
अगर अरुणाचल प्रदेश की टीम 11 अक्टूबर से शुरू हो रही रणजी ट्रॉफी में नगालैंड के खिलाफ अपना शुरुआती मुकाबला नहीं खेल पाती है तो उसे मैच गंवाने के साथ पूरे सीजन से निलंबन का भी खतरा हो सकता है। इस विवाद का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ सकता है। उनकी घरेलू सीजन की तैयारी और कमाई दोनों पर पानी फिर सकता है।
अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के भीतर विवाद हाल ही में हुए चुनाव के बाद सामने आया। चुनाव में नबाम विवेक अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद राज्य की छह जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर पीठ का रुख किया।
हाई कोर्ट में सितंबर के पहले सप्ताह में इस मामले पर दलीलें सुनी गईं, लेकिन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। ऐसे में राज्य क्रिकेट संघ के कामकाज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इसी कानूनी पेचीदगी के कारण टीम के चयन, प्रशिक्षण शिविर और आगामी घरेलू प्रतियोगिताओं की तैयारी पर असर पड़ा है।
BCCI सचिव देवाजीत सैकिया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अदालत के स्थगन आदेश के कारण बोर्ड इस मामले में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। देवाजीत सैकिया के मुताबिक, फिलहाल अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ में कोई निकाय काम नहीं कर रहा है। इसके चलते न तो चयन शिविर आयोजित हो सके और न ही सीजन के लिए टीम की तैयारी हो पाई। अदालत से मंजूरी मिलने तक बोर्ड के लिए आगे कदम उठाना संभव नहीं है।
अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष नबाम विवेक ने भी कहा कि अदालत के आदेश के कारण टीमों को मैदान में उतारना संभव नहीं हो पा रहा है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई थी और उसके बाद कोई अंतरिम आदेश नहीं आया।
विवेक ने बताया कि संघ ने बीसीसीआई को राज्य की जमीनी स्थिति से अवगत करा दिया है। जब तक अदालत से अंतरिम आदेश या अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक संघ घरेलू क्रिकेट में टीम उतारने की स्थिति में नहीं है।
विवेक के मुताबिक, अगर अदालत के आदेश के बावजूद टीम मैदान पर उतरती है तो इसे अवमानना माना जा सकता है। यह स्थिति आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं से लेकर सीनियर स्तर तक के क्रिकेट को प्रभावित कर रही है।
पुलिस जांच व बरामदगी: क्या आया सामने
- •वेंकट कृष्णा बी। रणजी ट्रॉफी के नए सीजन में अरुणाचल प्रदेश की टीम के खेलने पर संकट मंडरा रहा है। राज्य क्रिकेट संघ के दो गुटों के बीच विवाद और हाई कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण टीम के लिए घरेलू क्रिकेट में उतरना मुश्किल हो गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भी अदालती फैसले का इंतजार कर रहा है।
- •अगर अरुणाचल प्रदेश की टीम 11 अक्टूबर से शुरू हो रही रणजी ट्रॉफी में नगालैंड के खिलाफ अपना शुरुआती मुकाबला नहीं खेल पाती है तो उसे मैच गंवाने के साथ पूरे सीजन से निलंबन का भी खतरा हो सकता है। इस विवाद का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ सकता है। उनकी घरेलू सीजन की तैयारी और कमाई दोनों पर पानी फिर सकता है।
- •अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के भीतर विवाद हाल ही में हुए चुनाव के बाद सामने आया। चुनाव में नबाम विवेक अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद राज्य की छह जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर पीठ का रुख किया।
- •हाई कोर्ट में सितंबर के पहले सप्ताह में इस मामले पर दलीलें सुनी गईं, लेकिन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। ऐसे में राज्य क्रिकेट संघ के कामकाज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इसी कानूनी पेचीदगी के कारण टीम के चयन, प्रशिक्षण शिविर और आगामी घरेलू प्रतियोगिताओं की तैयारी पर असर पड़ा है।
- •BCCI सचिव देवाजीत सैकिया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अदालत के स्थगन आदेश के कारण बोर्ड इस मामले में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। देवाजीत सैकिया के मुताबिक, फिलहाल अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ में कोई निकाय काम नहीं कर रहा है। इसके चलते न तो चयन शिविर आयोजित हो सके और न ही सीजन के लिए टीम की तैयारी हो पाई। अदालत से मंजूरी मिलने तक बोर्ड के लिए आगे कदम उठाना संभव नहीं है।
- •अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष नबाम विवेक ने भी कहा कि अदालत के आदेश के कारण टीमों को मैदान में उतारना संभव नहीं हो पा रहा है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई थी और उसके बाद कोई अंतरिम आदेश नहीं आया।
- •विवेक ने बताया कि संघ ने बीसीसीआई को राज्य की जमीनी स्थिति से अवगत करा दिया है। जब तक अदालत से अंतरिम आदेश या अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक संघ घरेलू क्रिकेट में टीम उतारने की स्थिति में नहीं है।
- •विवेक के मुताबिक, अगर अदालत के आदेश के बावजूद टीम मैदान पर उतरती है तो इसे अवमानना माना जा सकता है। यह स्थिति आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं से लेकर सीनियर स्तर तक के क्रिकेट को प्रभावित कर रही है।
- •फिलहाल दोनों गुटों में से किसी ने भी तत्काल सुनवाई के लिए जोर नहीं दिया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत का फैसला कब आएगा। हालांकि, अंतरिम आदेश आने पर मौजूदा स्थिति बदल सकती है।
- •इस विवाद का असर केवल रणजी ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ ने गुरुवार को भुवनेश्वर में शुरू हुई वीनू मांकड़ U-19 ट्रॉफी में भी अपनी टीम नहीं उतारी। बीसीसीआई ने राज्य की टीम के संभावित रूप से प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने के बारे में उसके विरोधी संघों को भी जानकारी दी है।
- •अगर यह गतिरोध बना रहता है तो राज्य की टीम के लिए आगामी घरेलू सीजन में हिस्सा लेना मुश्किल होगा। खिलाड़ियों को मैच अभ्यास और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर नहीं मिलेंगे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट से होने वाली उनकी कमाई पर भी असर पड़ सकता है।
- •अरुणाचल प्रदेश की टीम के सामने प्रशासनिक संकट के अलावा मैदान पर प्रदर्शन सुधारने की चुनौती भी रही है। प्लेट लीग में खेलने वाली यह टीम पिछले दो सीजन की तरह पिछले सीजन में भी तालिका में सबसे नीचे रही थी।
- •सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लोढ़ा समिति की सिफारिशों के आधार पर अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के राज्यों को घरेलू क्रिकेट की मुख्य संरचना में शामिल किया गया था। हालांकि, टीम को दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों की टीमों के मुकाबले भी प्रदर्शन के स्तर में अंतर पाटने के लिए संघर्ष करना पड़ा है।
- •राज्य क्रिकेट संघों में गुटबाजी के कारण पहले भी बीसीसीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में बोर्ड ने प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए अलग-अलग कदम उठाए थे।
- •बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अनुरोध पर पुरुष और जूनियर लड़कों की टीमों के साथ-साथ महिला क्रिकेट के संचालन के लिए दो समितियां नियुक्त की थीं। इन समितियों में अनुभवी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को शामिल किया गया था।
- •हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के मामले में ऐसी व्यवस्था करना बोर्ड के लिए आसान नहीं है। देवाजीत सैकिया ने कहा कि जब हाई कोर्ट राज्य क्रिकेट संघ के विवाद की सुनवाई कर रहा हो और मौजूदा निकाय के कामकाज पर रोक लगी हो तब बोर्ड किसी प्रशासक की नियुक्ति नहीं कर सकता।
- •देवाजीत सैकिया ने उम्मीद जताई कि अदालत का फैसला किसी भी दिन आ सकता है, लेकिन जब तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक राज्य में क्रिकेट संचालन और टीमों की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
- •रणजी ट्रॉफी का पहला दौर 11 अक्टूबर से शुरू होना है। अरुणाचल प्रदेश को अपने मुकाबले अहमदाबाद में खेलने हैं। अगर टीम नगालैंड के खिलाफ मैच नहीं खेलती है तो उसे मैच गंवाना पड़ सकता है। पूरे सीजन से निलंबन का खतरा भी पैदा हो सकता है।
- •ऐसे में राज्य क्रिकेट संघ के दो गुटों के बीच चल रही लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ सकता है। अदालत के फैसले में देरी का मतलब उनके लिए सिर्फ मैचों से दूर रहना नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में खेलने और कमाई करने का अवसर गंवाना भी हो सकता है।
- •रिंकू सिंह फिर से इस सीजन में यूपी के लिए खेलते हुए नजर आएंगे। रिंकू सिंह फिलहाल भारतीय टी20 टीम का हिस्सा नहीं हैं। वह पूरे सीजन के लिए उपलब्ध हैं। टीम के अनुभवी खिलाड़ी करण शर्मा भी प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। करण का यूपी टी20 लीग 2026 में ऑलराउंड प्रदर्शन रहा था। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
कानूनी कार्रवाई और आरोपियों की वर्तमान स्थिति
फिलहाल दोनों गुटों में से किसी ने भी तत्काल सुनवाई के लिए जोर नहीं दिया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत का फैसला कब आएगा। हालांकि, अंतरिम आदेश आने पर मौजूदा स्थिति बदल सकती है।
इस विवाद का असर केवल रणजी ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट संघ ने गुरुवार को भुवनेश्वर में शुरू हुई वीनू मांकड़ U-19 ट्रॉफी में भी अपनी टीम नहीं उतारी। बीसीसीआई ने राज्य की टीम के संभावित रूप से प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने के बारे में उसके विरोधी संघों को भी जानकारी दी है।
अगर यह गतिरोध बना रहता है तो राज्य की टीम के लिए आगामी घरेलू सीजन में हिस्सा लेना मुश्किल होगा। खिलाड़ियों को मैच अभ्यास और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर नहीं मिलेंगे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट से होने वाली उनकी कमाई पर भी असर पड़ सकता है।
अरुणाचल प्रदेश की टीम के सामने प्रशासनिक संकट के अलावा मैदान पर प्रदर्शन सुधारने की चुनौती भी रही है। प्लेट लीग में खेलने वाली यह टीम पिछले दो सीजन की तरह पिछले सीजन में भी तालिका में सबसे नीचे रही थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लोढ़ा समिति की सिफारिशों के आधार पर अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के राज्यों को घरेलू क्रिकेट की मुख्य संरचना में शामिल किया गया था। हालांकि, टीम को दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों की टीमों के मुकाबले भी प्रदर्शन के स्तर में अंतर पाटने के लिए संघर्ष करना पड़ा है।
राज्य क्रिकेट संघों में गुटबाजी के कारण पहले भी बीसीसीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में बोर्ड ने प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए अलग-अलग कदम उठाए थे।
बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अनुरोध पर पुरुष और जूनियर लड़कों की टीमों के साथ-साथ महिला क्रिकेट के संचालन के लिए दो समितियां नियुक्त की थीं। इन समितियों में अनुभवी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को शामिल किया गया था।
हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के मामले में ऐसी व्यवस्था करना बोर्ड के लिए आसान नहीं है। देवाजीत सैकिया ने कहा कि जब हाई कोर्ट राज्य क्रिकेट संघ के विवाद की सुनवाई कर रहा हो और मौजूदा निकाय के कामकाज पर रोक लगी हो तब बोर्ड किसी प्रशासक की नियुक्ति नहीं कर सकता।
देवाजीत सैकिया ने उम्मीद जताई कि अदालत का फैसला किसी भी दिन आ सकता है, लेकिन जब तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक राज्य में क्रिकेट संचालन और टीमों की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
रणजी ट्रॉफी का पहला दौर 11 अक्टूबर से शुरू होना है। अरुणाचल प्रदेश को अपने मुकाबले अहमदाबाद में खेलने हैं। अगर टीम नगालैंड के खिलाफ मैच नहीं खेलती है तो उसे मैच गंवाना पड़ सकता है। पूरे सीजन से निलंबन का खतरा भी पैदा हो सकता है।
ऐसे में राज्य क्रिकेट संघ के दो गुटों के बीच चल रही लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ सकता है। अदालत के फैसले में देरी का मतलब उनके लिए सिर्फ मैचों से दूर रहना नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में खेलने और कमाई करने का अवसर गंवाना भी हो सकता है।
रिंकू सिंह फिर से इस सीजन में यूपी के लिए खेलते हुए नजर आएंगे। रिंकू सिंह फिलहाल भारतीय टी20 टीम का हिस्सा नहीं हैं। वह पूरे सीजन के लिए उपलब्ध हैं। टीम के अनुभवी खिलाड़ी करण शर्मा भी प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। करण का यूपी टी20 लीग 2026 में ऑलराउंड प्रदर्शन रहा था। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
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विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।
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