## घटना कैसे हुई और क्या है पूरा मामला
यूपी में सपा को बड़ा झटका! 14 अक्टूबर को BJP में शामिल होंगे ये तीन विधायक
3 बागी विधायकों ने बढ़ाई अखिलेश की टेंशन! 14 अक्टूबर को अमेठी के भव्य कार्यक्रम में थामेंगे BJP का हाथ
Hindi BJP में शामिल होंगे MLA राकेश प्रताप सिंह; बोले- रामचरितमानस जलाने वालों के साथ राजनीति संभव नहीं
भाजपा में शामिल होंगे सपा के बागी विधायक अभय सिंह, सदस्यता ग्रहण में पहुंचेंगे पंकज चौधरी समेत कई दिग्गज नेता
गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह भाजपा में होंगे शामिल: 14 अक्टूबर को अमेठी में सपा के दो और बागी MLA के सा...
संघमित्रा मौर्य अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के अलग राजनीतिक रास्ते के बावजूद भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहरा रही हैं। बदायूं की पूर्व सांसद बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में जुटी हैं, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश ने जेल से बचने के लिए नथवानी को बनाया सांसद? BJP के सहयोगी का दावा
तीसरी सीट पर दांव से सपा ने क्यों खींचे पांव? जानिए अखिलेश ने क्यों चुना ‘त्याग’ का रास्ता
## मुख्य पुष्ट तथ्य और जांच के अहम बिंदु
• यूपी में सपा को बड़ा झटका! 14 अक्टूबर को BJP में शामिल होंगे ये तीन विधायक • 3 बागी विधायकों ने बढ़ाई अखिलेश की टेंशन! 14 अक्टूबर को अमेठी के भव्य कार्यक्रम में थामेंगे BJP का हाथ • Hindi BJP में शामिल होंगे MLA राकेश प्रताप सिंह; बोले- रामचरितमानस जलाने वालों के साथ राजनीति संभव नहीं • भाजपा में शामिल होंगे सपा के बागी विधायक अभय सिंह, सदस्यता ग्रहण में पहुंचेंगे पंकज चौधरी समेत कई दिग्गज नेता • गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह भाजपा में होंगे शामिल: 14 अक्टूबर को अमेठी में सपा के दो और बागी MLA के सा... • संघमित्रा मौर्य अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के अलग राजनीतिक रास्ते के बावजूद भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहरा रही हैं। बदायूं की पूर्व सांसद बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में जुटी हैं, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। • अखिलेश ने जेल से बचने के लिए नथवानी को बनाया सांसद? BJP के सहयोगी का दावा • तीसरी सीट पर दांव से सपा ने क्यों खींचे पांव? जानिए अखिलेश ने क्यों चुना ‘त्याग’ का रास्ता • Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ी खबर, नहीं होगी वोटिंग, एक भी विधायक नहीं डालेंगे वोट • Hindi राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के रिस्क से पीछे हटी सपा, अखिलेश यादव भी बोले- तीन नहीं 403 पर नजर • केशव बोले- अखिलेश ने पहली बार समझदारी दिखाई: राजभर का सपा पर तंज- टांय टांय फिस्स, पूर्व भाजपा सांसद ने लिख... • मुस्लिम वोटों से BJP समर्थक को राज्यसभा..., AIMIM नेता का अखिलेश पर हमला • सपा के राज्यसभा उम्मीदवार नाथवानी ने लंबा-चौड़ा पोस्ट कर PM मोदी को दी बधाई, तारीफ में पढ़े कसीदे • Hindi PM मोदी की तारीफ में धनराज नथवानी का सोशल मीडिया पोस्ट, AIMIM ने सपा पर उठाए सवाल • केशव बोले- सपा के आधे कैंडिडेट तो भाजपा की तरफ: पीएम मोदी की जय-जयकार कर रहे, 80 पहले ही हमारा, 20 में भी ब... • 'दिल ही दिल अखिलेश भी प्रशंसा करते हैं', पीएम मोदी को बधाई देने पर धनराज नाथवानी का भाजपा ने किया समर्थन • संघमित्रा मौर्य अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के अलग राजनीतिक रास्ते के बावजूद भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहरा रही ...और पढ़ें • स्वामी प्रसाद मौर्य अलग पार्टी बनाकर आइएनडीआइ गठबंधन में तलाश रहे संभावना • अंकित गुप्ता, बदायूं। बसपा, भाजपा फिर सपा छोड़ अपनी जनता पार्टी बना चुके स्वामी प्रसाद मौर्य अब आइएनडीआइ (इंडी) गठबंधन में संभावना तलाश रहे। वह इसके पीछे तर्क देते कि किसी भी तरह भाजपा को रोकना है...। उनके इस कदम से इतर बेटी डाॅ. संघमित्रा मौर्य भाजपा में भविष्य तैयार करने के लिए मेहनत कर रहीं। • पिता की अलग राह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के रूप में बदलेगी? सवाल पर डाॅ. संघमित्रा कहती हैं कि 'उनसे पारिवारिक विषयों पर ही बात होती है। उन्होंने वर्ष 2022 में ही मुझे अपने निर्णय लेने की छूट दे दी थी। • मैं भाजपा की निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। बूथ स्तर तक काम करने का आधार चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि पार्टी को मजबूती देना है।' उनका यह बयान संगठनात्मक सक्रियता वाला है, मगर इसकी पृष्ठभूमि में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी मानी जा रही। • लखनऊ से एमबीबीएस करने वाली डाॅ. संघमित्रा को पिता स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीति में लाए थे। वर्ष 2010 में उन्होंने कासगंज के वार्ड सात से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। इसके बाद एटा की अलीगंज सीट से विधानसभा चुनाव लड़ीं, मगर हार गई थीं। • वर्ष 2014 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सामने बसपा के टिकट से मैनपुरी में लोकसभा चुनाव लड़ीं, उसमें भी हार हुई। वर्ष 2016 में पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उन्होंने भाजपा में राजनीतिक पारी शुरू की। • वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में डाॅ. संघमित्रा ने सपा के धर्मेंद्र यादव को 18,454 मतों से हराकर बदायूं में भाजपा का 28 साल का सूखा खत्म किया था। इसके बाद परिस्थितियां बदलती गईं। • वर्ष 2022 में स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए, तब डाॅ. संघमित्रा ने उनके पक्ष में कई बयान दिए थे। वह भाजपा के प्रदेश के नेताओं पर सवाल उठाती थीं, मगर केंद्रीय नेतृत्व में सदैव आस्था प्रकट करती रहीं।
## आधिकारिक कार्रवाई और आगे की स्थिति
Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ी खबर, नहीं होगी वोटिंग, एक भी विधायक नहीं डालेंगे वोट
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संघमित्रा मौर्य अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के अलग राजनीतिक रास्ते के बावजूद भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहरा रही ...और पढ़ें
स्वामी प्रसाद मौर्य अलग पार्टी बनाकर आइएनडीआइ गठबंधन में तलाश रहे संभावना
अंकित गुप्ता, बदायूं। बसपा, भाजपा फिर सपा छोड़ अपनी जनता पार्टी बना चुके स्वामी प्रसाद मौर्य अब आइएनडीआइ (इंडी) गठबंधन में संभावना तलाश रहे। वह इसके पीछे तर्क देते कि किसी भी तरह भाजपा को रोकना है...। उनके इस कदम से इतर बेटी डाॅ. संघमित्रा मौर्य भाजपा में भविष्य तैयार करने के लिए मेहनत कर रहीं।
पिता की अलग राह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के रूप में बदलेगी? सवाल पर डाॅ. संघमित्रा कहती हैं कि 'उनसे पारिवारिक विषयों पर ही बात होती है। उन्होंने वर्ष 2022 में ही मुझे अपने निर्णय लेने की छूट दे दी थी।
## सिलसिलेवार घटनाक्रम और आधिकारिक खुलासे
मैं भाजपा की निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। बूथ स्तर तक काम करने का आधार चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि पार्टी को मजबूती देना है।' उनका यह बयान संगठनात्मक सक्रियता वाला है, मगर इसकी पृष्ठभूमि में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी मानी जा रही।
लखनऊ से एमबीबीएस करने वाली डाॅ. संघमित्रा को पिता स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीति में लाए थे। वर्ष 2010 में उन्होंने कासगंज के वार्ड सात से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। इसके बाद एटा की अलीगंज सीट से विधानसभा चुनाव लड़ीं, मगर हार गई थीं।
वर्ष 2014 में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सामने बसपा के टिकट से मैनपुरी में लोकसभा चुनाव लड़ीं, उसमें भी हार हुई। वर्ष 2016 में पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उन्होंने भाजपा में राजनीतिक पारी शुरू की।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में डाॅ. संघमित्रा ने सपा के धर्मेंद्र यादव को 18,454 मतों से हराकर बदायूं में भाजपा का 28 साल का सूखा खत्म किया था। इसके बाद परिस्थितियां बदलती गईं।
वर्ष 2022 में स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए, तब डाॅ. संघमित्रा ने उनके पक्ष में कई बयान दिए थे। वह भाजपा के प्रदेश के नेताओं पर सवाल उठाती थीं, मगर केंद्रीय नेतृत्व में सदैव आस्था प्रकट करती रहीं।
स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर की फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़े, तब भी डाॅ. संघमित्रा प्रचार करने पहुंची थीं। उस समय अंदेशा जताया जाता था कि वह भी पिता के साथ अलग रास्ता तय कर सकती हैं, मगर ऐसा नहीं हुआ।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया, इसके बावजूद पार्टी में सक्रिय रहीं। प्रत्याशी के पक्ष में सभाएं एवं जनसंपर्क करती थीं। बूथ स्तरीय कार्यक्रमों से लेकर संगठन के मंच पर उनकी उपस्थिति बनी हुई है।
डाॅ. संघमित्रा ने पिछड़ा वर्ग बहुलता वाला बदायूं जिला छोड़ा ना भाजपा में अपनी सक्रियता। वह सामाजिक आधार मजबूत करने में जुटी हैं। जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर मौर्य-शाक्य मतदाताओं की संख्या अच्छी है...यह बात भाजपा को पता है और डाॅ. संघमित्रा को भी।
यही कारण है कि दोनों एक-दूसरे का साथ दे रहे। यही कारण है कि इस सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा। डाॅ. संघमित्रा पूर्व सांसद हैं, मगर बदली परिस्थितियों में दिल्ली के बजाय लखनऊ का रास्ता चुनने में संकोच नहीं करेंगी।
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## ताजा स्थिति व आगे का अपडेट
विशेषज्ञों और पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कदम के महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। आगे की आधिकारिक घोषणाओं की प्रतीक्षा है।
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