उनकी जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं।

## Detailed Chronological Breakdown

उनकी जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं।

सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं।

वहीं, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड के वामपंथी नेता भी ममदानी की राजनीति पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममदानी ने यूरोप के वामपंथ को चुनाव लड़ने का नया तरीका दे दिया है।

## Key Verified Facts

• उनकी जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं। • सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं। • वहीं, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड के वामपंथी नेता भी ममदानी की राजनीति पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममदानी ने यूरोप के वामपंथ को चुनाव लड़ने का नया तरीका दे दिया है। • 1. जर्मनी: सस्ते घरों का वादा किया, सबसे ज्यादा सीटें मिलीं • बर्लिन में चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों को संबोधित करतीं लेफ्ट पार्टी की प्रमुख उम्मीदवार एलिफ एराल्प। अगर यूरोप में किसी एक नेता को ममदानी से सबसे सीधे तौर पर जोड़ा जा सकता है, तो वह एलिफ एराल्प हैं। 45 साल की एराल्प वकील हैं और तुर्की मूल के परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता 1980 के तुर्की सैन्य तख्तापलट के बाद जर्मनी आए थे। एराल्प 2017 में द लिंक से जुड़ी थीं। • पिछले महीने हुए चुनाव में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा- महंगा शहर और महंगा किराया। एराल्प ने बर्लिन में निजी कंपनियों के पास मौजूद करीब 2.2 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने की मांग की। • इसका फायदा द लिंक को मिला। वह चुनाव में करीब 25.7% वोट मिले और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। • 2. ब्रिटेन: पर्यावरण के मुद्दे को महंगे घर से जोड़ा

## Background, Context & Disclosures

1. जर्मनी: सस्ते घरों का वादा किया, सबसे ज्यादा सीटें मिलीं

बर्लिन में चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों को संबोधित करतीं लेफ्ट पार्टी की प्रमुख उम्मीदवार एलिफ एराल्प। अगर यूरोप में किसी एक नेता को ममदानी से सबसे सीधे तौर पर जोड़ा जा सकता है, तो वह एलिफ एराल्प हैं। 45 साल की एराल्प वकील हैं और तुर्की मूल के परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता 1980 के तुर्की सैन्य तख्तापलट के बाद जर्मनी आए थे। एराल्प 2017 में द लिंक से जुड़ी थीं।

पिछले महीने हुए चुनाव में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा- महंगा शहर और महंगा किराया। एराल्प ने बर्लिन में निजी कंपनियों के पास मौजूद करीब 2.2 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने की मांग की।

इसका फायदा द लिंक को मिला। वह चुनाव में करीब 25.7% वोट मिले और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा।

2. ब्रिटेन: पर्यावरण के मुद्दे को महंगे घर से जोड़ा

लंदन के सेंट पैनक्रास गार्डन्स में भाषण देते ग्रीन पार्टी नेता जैक पोलांस्की। ब्रिटेन में ममदानी से सबसे ज्यादा तुलना जैक पोलांस्की की होती है। वे ग्रीन पार्टी के नेता हैं। यह पार्टी मुख्य रूप से पर्यावरण और जलवायु के मुद्दों पर राजनीति करती रही है। लेकिन पोलांस्की ने इनका दायरा बढ़ाया है।

पोलांस्की महंगाई, महंगे घर, बढ़ते किराए, रोजमर्रा के खर्च और अमीरों पर ज्यादा टैक्स जैसे मुद्दों को पर्यावरण की राजनीति से जोड़ते हैं। पोलांस्की इसे ‘इको-पॉपुलिज्म’ कहते हैं।

## Verified Factual Context

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